SULTAN E KARBALA KO HAMARA SALAM HO NAAT LYRICS

SULTAN E KARBALA KO HAMARA SALAM HO NAAT LYRICS

 

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Abbas Naamdar Hain Zakhmon Se Choor Choor
Us Paikar-e-Riza Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Akbar Se Noujawan Bhi Ran Me Huye Shaheed
Ham Shakl-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Bhai, Bhatija, Bhanja Sab Ho Gaye Nisar
Har Laal-e-Be-Baha Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Asghar Ki Nanhi Jaan Pe Lakhon Durood Hon
Mazloom-o-Be-Khata Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Ho Kar Shaheed Qoum Ki Kashti Tira Gaye
Ummat Ke Na Khuda Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

Nasir Wila-e-Shah Me Kahta Hai Baar Baar
Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho

Sultan-e-Karbala Ko Hamara Salam Ho
Janan-e-Mustafa Ko Hamara Salam Ho

सुल्तान ए कर्बला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

अब्बास नामदार हैं ज़ख्मों से चूर चूर
उस पैकर-ए-रिज़ा को हमारा सलाम हो

सुल्तान-ए-कर्बला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

अकबर से नौजवान भी रन में हुए शहीद
हम शक्ल ए मुस्तफ़ा को हमारा सलाम हो

सुल्तान-ए-कर्बला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

भाई, भतीजे, भांजे सब हो गए निसार
हर लाल ए बे-बहा को हमारा सलाम हो

सुल्तान-ए-करबला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

असग़र की नन्ही जान पे लाखों दरूद हों
मज़लूम-ओ-बे-ख़ता को हमारा सलाम हो

सुल्तान-ए-करबला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

हो कर शहीद क़ौम की कश्ती तिरा गए
उम्मत के ना-ख़ुदा को हमारा सलाम हो

सुल्तान ए कर्बला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

नासिर विला-ए-शाह में कहता है बार-बार
सुल्तान ए करबला को हमारा सलाम हो

सुल्तान ए कर्बला को हमारा सलाम हो
जानान-ए-मुस्त़फ़ा को हमारा सलाम हो

 

रमज़ान के बाद सब से अफ़ज़ल रोज़ा

हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि रसूले रहमतो बरकत सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया रमजान शरीफ़ के बाद अफ़जल रोजा अल्लाह तआला का महीना मुहर्रम शरीफ़ में आशूरा का रोजा है और फर्ज नमाज के बाद अफजल नमाज़ रात की नमाज यानी तहज्जुद की नमाज है।
(मुस्लिम शरीफ, निश्कात शरीफ, रा. 171 )

9 मुहर्रम और 10 मुहर्रम दोनों दिन रोज़ा रखा जाये, एक और बात जिन लोगों का रमज़ान का कोई भी रोज़ा कभी का भी छूटा हुआ हो तो वो नियत रमज़ान के क़ज़ा की ही करें इस तरह उनका रमज़ान का रोज़ा भी अदा हो जायेगा और मौला ने चाहा तो मुहर्रम के दिन रोज़ा रखने का भी सवाब पायेंगे

ऐ ईमान वालो ! यौमे आशूरा यानी दस मुहर्रम शरीफ़ बड़ा अजीम दिन है उस दिन का रोजा रमज़ान शरीफ़ के बाद सबसे अफ़ज़ल रोजा है, अल्लाह तआला हमें भी उस अजीम और बरकत व रहमत वाले दिन तमाम खेल तमाशों की गलत रस्मों से बचाए और दस गुहर्रम शरीफ के बरकत वाले दिन अदब व एहतिराम के साथ रोजा रखने की और इबादतों में मशगूल रहने की तौफीक नसीब फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।
(अनवारूल बयान जिल्द 1 सफा 264)

मसलक ए आला हज़रत पे कायम रहो
ज़िंदगी दी गई है इसी के लिए

मसलक ए आला हजरत जिंदाबाद
हुजूर ताजुशशारिया जिंदाबाद
हुजूर कायदे मिल्लत जिंदाबाद

HAM HAI BAREILLY WALE

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करबला में क़यामते सुग़रा

ⓩ हैरत दर हैरत वाली बात ये है कि जिस लश्कर में सिर्फ 82 लोग हों जिनमें औरतें और बच्चे भी हों और फिर ना उनके पास जंगी सामान हो उनसे लड़ने के लिए 22000 का लश्कर मय साज़ो सामान के,फिर भी यज़ीदियों के डर की इंतिहा देखिये कि इतनी बड़ी फौज रखने के बावजूद उन हाशमी शेरों से लड़ने की हिम्मत ना थी सो 500 घुड़सवार का लश्कर अलग से नहरे फुरात पर बिठा दिया ताकि उन्हें पानी ना मिलने पाये

कर्बला का वाक़िया ऐसा वाक़िया है जो सुन्नी तो सुन्नी बल्कि ग़ैर सुन्नी यहां तक कि ग़ैर मुस्लिमों तक को पता है,पर आपको उन बातों से रूबरू कराता हूं जो शायद कि आपके इल्म में ना हो 72 हज़रात इस जंग में शहीद हुए उन सबकी फ़ेहरिस्त अक्सर आजकल हर ग्रुप में भेजी जाती है,पर उनमें से जो हज़रात अहले बैत से हैं उन मुक़द्दस हस्तियों के नाम दर्ज करता हूं

हज़रत इमाम हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के 4 साहबज़ादे इस जंग में शहीद हुए

हज़रत क़ासिम बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत अब्दुल्लाह बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत उमर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत अबु बकर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

हज़रत मौला अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दूसरी बीवियों से 5 साहबज़ादे इस जंग में शहीद हुए

हज़रत अब्बास बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत उस्मान बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत मुहम्मद बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत जाफर बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

हज़रते अक़ील के 4 फ़रज़न्द इस जंग में शहीद हुए

हज़रत मुस्लिम बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु,ये इमाम आली मक़ाम के कर्बला पहुंचने से पहले ही अपने 2 बेटों के साथ शहीद कर दिए गए थे
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत अब्दुर्रहमान बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत जाफर बिन अक़ील रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

आपकी बहन हज़रत ज़ैनब रज़ियल्लाहु तआला अन्हा के 2 बेटे शहीद हुए

हज़रत औन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत मुहम्मद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

सय्यदुश शुहदा इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के अलावा आपके 2 बेटे भी शहीद हुए

हज़रत अली अकबर बिन हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु
हज़रत अली असग़र बिन हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

ⓩ बाकी बचे हुए आपके अज़ीज़ थे जो शहीद हुए इसके अलावा हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत उमर बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु व हज़रत मुहम्मद बिन उमर बिन अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और कुछ कम उम्र साहबज़ादे क़ैदी बनाए गए,हज़रते सकीना रज़ियल्लाहु तआला अन्हा जिनका अक़्द हज़रत क़ासिम बिन हसन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के साथ मशहूर है,ये गलत है निस्बत हुई थी निकाह नहीं हुआ था,आपका निकाह मुस’अब बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के साथ हुआ

📕 खुतबाते मुहर्रम,सफ़ह 427-428

फुक़्हा – हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मेरा रब कहता है कि मैंने हज़रत यहया अलैहिस्सलाम के क़त्ल के बदले 70000 को सज़ा दी और हुसैन के बदले 140000 को सज़ा दूंगा

📕 खसाइसे कुबरा,सफह 126

क़ातिलीन हुसैन का अंजाम – 10 मुहर्रमुल हराम 61 हिजरी को कर्बला में जिसका खून बहाकर यज़ीद पलीद ने हुक़ूमत हासिल की थी वो हुक़ूमत भी ज़्यादा दिन तक ना रही और 3 साल 7 महीने बाद ही 5 रबियुल अव्वल 64 हिजरी में 39 साल की उम्र में वो जहन्नम को रवाना हुआ,उसके बाद उसका बेटा यज़ीद बिन मुआविया तख़्त पर बैठा जो कि नेक शख्स था और बाप के बुरे कामों से नफरत करता था, जब वो तख़्त पर बैठा तो बीमार था और सिर्फ 2-3 महीने ही खिलाफत कर सका और 21 साल की उम्र में उसका इंतेकाल हो गया,अब मिस्र व शाम के लोगों ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की बैयत कर ली मगर मरवान ने खूफ़िया साजिशों से मिस्र व शाम पर कब्ज़ा कर लिया,जब वो मरने लगा तो अपने बेटे अब्दुल मलिक को गद्दी सौंप दी,अब्दुल मलिक बिन मरवान के बारे में अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि लोग बेटा पैदा करते हैं मगर मरवान ने बाप पैदा किया है,ये पहले तो नेक आदमी था मगर बाद में फासिको फ़ाजिर हो गया,इसके ज़मानये खिलाफत में कूफ़ा पर मुख़्तार बिन उबैद सक़फ़ी का तसल्लुत हुआ,मुख़्तार ने इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की शहादत का खूब इन्तेक़ाम लिया मगर आखिर ज़माने में मुख्तार भी नुबूवत का दावा करके काफिरो मुर्तद हो गया

! सबसे पहले अम्र बिन सअद व उसके बेटे हफ्स बिन अम्र की गरदन कटवाई

! खूली बिन यज़ीद जिसने इमाम का सरे मुबारक तन से जुदा किया था उसको सरे राह क़त्ल करवाकर उसकी लाश को जलवाया

! शिमर ज़िल जौशन खबीस का सर काटकर लाश को कुत्तों के सामने डाला गया

! अब्दुल्लाह बिन उसैद जुहनी,मालिक बिन नुसैर बद्दी,हमल बिन मालिक महारबी इन तीनों के हाथ पैर काटकर ज़िंदा छोड़ दिया गया,ये तीनों इसी तरह तड़पते बिलखते मर गए

! हकीम बिन तुफ़ैल ताई वो खबीस है जिसने हज़रत अब्बास अलमदार के कपड़े उतार लिए थे,सो इसको जिंदा ही नंगा करके तीरों से छलनी कर दिया गया

! अम्र बिन सुबैह ने शोहदाए करबला में से कई को ज़ख़्मी किया था,उसे नेज़ों से छेद छेद कर मारा गया

! ज़ैद इब्ने रक़ाद वो खबीस था जिसने अब्दुल्लाह बिन मुसलिम बिन अक़ील की पेशानी पर तीर मारा था,इसको तीरों से छलनी किया गया मगर जान बाकी थी तो उसको ज़िंदा जलवाया गया

! अब्दुल्लाह इब्ने ज़ियाद वो हरामखोर खबीस था जिसने अहले बैत पर काफी ज़ुल्म किये,शहादते कर्बला के ठीक 6 साल बाद 10 मुहर्रम 67 हिजरी को इस कुत्ते का सर काटकर वहीं रखा गया,जहां इसने इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का सरे मुबारक रखा था,उस ज़लील के सर पर एक सांप नमूदार हुआ जो उसके नथुनों से घुसकर मुंह से निकलता रहा और फिर गायब हो गया

! 6000 कूफ़ी यानि राफजी मुख़्तार के हाथों मारे गए,कितने अंधे और कोढ़ी हो गए,कुछ की आंखों में जलती हुई सलाई फेरी गयी,कुछ को जिंदा जलाया गया,और कुछ के मुंह सुअर की तरह हो गए,और कुछ तो ऐसे थे कि पानी पीते मगर प्यास न बुझती और युंही तड़प तड़प कर मरे,और जैसा कि रब ने फ़रमाया था कि मैं 140000 को मारूंगा सो उसने अपना वादा पूरा किया और 140000 को हलाक़ किया,यहां पर एक सवाल उठता है कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से जंग को तो 22000 का लश्कर ही गया था तो 140000 क्यों मारे गए,तो इसका जवाब ये है जैसा कि हदीस पाक में है कि जो शख्स गुनाह में शामिल ना हो मगर उसे अच्छा समझता हो तो वो भी उसी के मिस्ल है,तो अगर जंग में 22000 का लश्कर ही मौजूद था मगर हज़ारों मक्कार दोगले कूफ़ी यानि राफजी यानि शिया उसमे शामिल थे तो अल्लाह ने उन सबको तरह तरह की मुसीबतों में डालकर हलाक किया,और आज भी और क़यामत तक ये गद्दार युंहि मुसीबत मे गिरफतार रहेंगे युंहि अपना सीना पीटते रहेंगे और यही कहते रहेगे कि ऐ हुसैन हम ना थे

📕 ख़ुतबाते मुहर्रम,सफह 495—510
📕 खसाइसे कुबरा,सफह 126

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To Be Continued
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ⓩ Hairat dar hairat waali baat ye hai ki jis lashkar me sirf 82 log hon aur jinme aurtein aurtein aur bachche bhi shaamil hon aur to aur unke paas ladne ke liye jungi saaman bhi na ho un 82 logon se ladne ke liye 22000 ka lashkar mai saazo saaman ke karbala ke maidan me utaara gaya,phir bhi yazidiyon ke darr ki inteha dekhiye ki itni badi fauj rakhne ke bawajood bhi un haashmi shero se ladne ki himmat na thi so 500 ghudsawar ka lashkar alag se nahre furaat par laga diya gaya taaki unhein paani na milne paaye,karbala ka waqiya aisa hai jo sunni to sunni balki gaire sunni yahan tak ki gair muslim bhi isse achchhi tarah waaqif hai,72 hazraat is jung me shaheed hue iski fehrist zyadatar group me aksar bheji jaati rahi hai par unme jo ahle bait kiraam se hain un muqaddas hastiyon ke naam darj karta hoon

Hazrat imaam hasan raziyallahu taala anhu ke 4 saahabzade is jung me shaheeh hue

Hazrat qasim bin hasan raziyallahu taala anhu
Hazrat abdullah bin hasan raziyallahu taala anhu
Hazrat umar bin hasan raziyallahu taala anhu
Hazrat abu bakar bin hasan raziyallahu taala anhu

Hazrat maula ali raziyallahu taala anhu ke doosri biwiyon se 5 saahabzade is jung me shaheeh hue

Hazrat abbas bin ali raziyallahu taala anhu
Hazrat usman bin ali raziyallahu taala anhu
Hazrat abdullah bin ali raziyallahu taala anhu
Hazrat muhammad bin ali raziyallahu taala anhu
Hazrat jaafer bin ali raziyallahu taala anhu

Hazrat aqeel ke 4 saahabzade is jung me shaheeh hue

Hazrat muslim bin aqeel raziyallahu taala anhu,ye imaam aali maqaam ke karbala pahunchne se pahle hi apne 2 beton ke saath shaheed ho chuke the
Hazrat abdullah bin aqeel raziyallahu taala anhu
Hazrat abdur rahman bin aqeel raziyallahu taala anhu
Hazrat jaafer bin aqeel raziyallahu taala anhu

Aapki bahan hazrat zainab raziyallahu taala anha ke 4 saahabzade is jung me shaheeh hue

Hazrat aun raziyallahu taala anhu
Hazrat muhammad raziyallahu taala anhu

Sayyadus shuhda hazrat imaam husain raziyallahu taala anhu ke saath saath aapke 2 bete bhi is jung me shaheed hue

Hazrat ali akbar bin husain raziyallahu taala anhu
Hazrat ali asgar bin husain raziyallahu taala anhu

FUQHA – Baaqi ke log aapke azeez wa aqaarib the jo is jung me shaheed hue,iske alawa hazrat imaam zainul aabedeen raziyallahu taala anhu wa hazrat umar bin hasan raziyallahu taala anhu wa hazrat muhammad bin umar bin ali raziyallahu taala anhu aur kuchh kam umr saahab zaade qaidi banaye gaye,hazrate saqina raziyallahu taala anha ka aqd hazrat qasim bin hasan raziyallahu taala anhu ke saath mashhoor hai ye galat hai sirf nisbat huyi thi nikah nahin hua tha,aapka nikah hazrat mus’ab bin zubair raziyallahu taala anhu ke saath hua

📕 Khutbate muharram,safah 427-428

FUQHA – Huzoor sallallahu taala alaihi wasallam farmate hain ki mera rub kahta hai ki maine yahya alaihissalam ki shahadat ke badle 70000 logon ko saza di aur husain ke badle 140000 ko saza doonga

📕 Khasaise kubra,safah 126

QAATILEENE HUSAIN KA ANJAAM – 10 muharramul haraam 61 hijri ko karbala me jiska khoon bahakar yazeed paleed ne hukumat haasil ki thi wo hukumat bhi zyada din tak na rahi aur 3 saal 7 mahine baad hi yaani 5 rabiul awwal 64 hijri me 39 saal ki umr me wo jahannam ko rawana hua,uske baad uska beta jiska naam muaviya tha takht par baitha ye ek nek shakhs tha aur baap ke bure kaamo se nafrat karta tha,jab wo takht nasheen hua to beemar tha aur isi bimari me wo sirf 2 ya 3 mahine ki khilafat kar saka aur 21 saal ki umr me uska bhi inteqal ho gaya,ab misr wa shaam ke logon ne hazrat abdullah bin zubair raziyallahu taala anhu ki baiyat kar li magar marwaan ne khufiya sajisho se misr wa shaam par qabza kar liya,marwaan ne marne se pahle wo gaddi apne bete abdul malik ko saunp di,abdul malik bin marwaan ke baare me hazrat abdullah bin zubair raziyallahu taala anhu farmate hain ki log beta paida karte hain magar marwaan ne abdul malik ki soorat me baap paida kiya hai,abdul malik pahle to nek shakhs tha magar baad me faasiq o faajir ho gaya iske zamanaye khilafat me koofa par mukhtar bin ubaid saqfi ka tasallut hua,mukhtar ne imaam husain raziyallahu taala anhu ki shahadat ka khoob badla liya magar marne se pahle wo daawaye nubuwat karke kaafiro murtad ho gaya,kiska kya anjaam hua mulahza karen

! Sabse pahle amr bin sa’ad wa uske bete hafs ki gardan katwayi

! Khooli bin yazeed jisne imaam ka sare mubarak tan se juda kiya tha usko sare aam qatl karwakar uski laash ko jalwaya

! Shimar bin joshan khabees ka sar kaatkar uski laash ko kutto ko khilaya gaya

! Abdullah bin usaid juhni malik bin nusair baddi wa hamal bin maalik maharbi in teeno bad bakhto ke haath pair kaat kar isi tarah zinda chhod diya gaya aur ye teeno tadap tadap kar mar gaye

! Hakeem bin tufail tayi wo khabees hai jisne hazrat abaas alamdaar ke kapde utaar liye the so iske kapde utaar kar isko nanga hi teero se chhalni kar diya gaya

! Amr bin suhaib ne shuhdaye karbala me se kayi ko zakhmi kiya tha so use nezo se chhed chhed kar maara gaya

! Zaid ibne raqaad wo khabees tha jisne abdullah bin muslim bin aqeel ki peshani par teer maara tha isko teero se hi chaalni kiya gaya magar jaan baaqi thi to usi tarah jalwa diya gaya

! Abdullah ibne zyaad wo haraam khor khabees tha jisne ahle bait par bahut zulm kiye,shahadate karbala ke theek 6 saal baad usi muharram ki 10 wi taareekh 67 hijri ko is kutte ka sar kaat kar wahin rakha gaya jahan isne imaam ka sare mubarak rakha tha,us zaleel ke sar par ek gaibi saanp namudaar hua jo uske nathuno se ghuskar munh se nikalta raha aur kuchh deir baad gaayab ho gaya

! 6000 koofi yaani raafji mukhtar ke haathon maare gaye,kitne andhe aur kodhi ho gaye,kuchh ki aankhon me jalti huyi salayi pheri gayi,kuchh ko zinda jala diya gaya,kuchh ke munh to duniya me hi suwar ki tarah ho gaye,kuchh aise the ki paani peete the magar pyaas na bujhti thi aur yunhi pyaase tadap tadap kar mare,aur waisa hi hua jaisa ki rub taala ne farmaya tha ki main husain ke badle 140000 ko maarunga so usne apna waada poora kiya,yahan ek sawal ye uthta hai ki imaam aali maqaam se jung karne ko to 22000 ka lashkar hi aaya tha to saza 140000 ko kyun di gayi to iska jawab ye hai ki hadise paak me aata hai ki jo shakhs gunaah me shaamil na ho magar use achchha jaanta ho to wo bhi usi me shaamil hai to agar che imaam ke khilaf 22000 ka lashkar zaahiri hi aaya tha magar hazaron makkar dogle farebi jhoote buzdil koofi yaani raafji yaani shiya kahin na kahin is saaneh me shaamil the isi liye ALLAH taala ne un sab khabeeso ko tarah tarah ki musibat me daalkar halaaq kiya,aur aaj bhi aur qayamat tak ye gaddar yunhi musibat me giraftaar rahenge aur apna seena peette rahenge aur yahi kahte rahenge ki Ai husain hum na the

📕 Khutbate muharram,safah 495—510
📕 Khasaise kubra,safah 126

 

اردو ہندی انگلش  उर्दू हिन्दी एवं अंग्रेजी

فضائل اہلبیت

(رسول ﷲ صلی اللہ تعالیٰ علیہ وسلم نے) ایک اور جگہ ارشاد فرمایا: جو شخص اولاد عبد المطلب میں سے کسی کے ساتھ اچھا سلوک کرے اور اس کا صلہ دنیا میں نہ پائے تو میں بہ نفس نفیس روز قیامت اس کا صلہ عطا فرماؤں گا۔ (تاریخ بغداد)

ایک اور روایت میں فرمایا: جسے پسند ہو کہ اس کی عمر میں برکت ہو الله تعالی اسے اپنی دی ہوئی نعمت سے بہتر مند کرے تو اسے لازم ہے کہ میرے بعد میرے اہل بیت سے اچھا سلوک کرے۔ جو ایسا نہ کرے اس کی عمر کی برکت اُڑ جائے اور قیامت میں میرے سامنے کالا منہ لے کر آئے۔ (کنز العمال)

(Rasoolullah) ﷺ  In another narration, He said:
Whoever behaves well with any of the offspring of ‘Abdul Muttalib, and he does not get his reward in this world, then I will reward him myself on the Day of Judgement. (Tarikh Baghdad)

‏He ﷺ also said: Whoever wants to be blessed with long life and that Allah blesses him with His divine grace, then he must treat my family well after me. Whoever does not do so, the blessings of his life will fade away and he will come before me on the Day of Resurrection with his face blackened. (Kanz al-Ummal)

(रसूलुल्लाह ﷺ ने)‏एक और जगह इरशाद फ़रमाया:
जो शख़्स औलादे अ़ब्दुल मुत़्त़लिब में से किसी के साथ अच्छा सुलूक करे और इस का सिला दुनिया में न पाये, तो मैं ब-नफ़्से नफ़ीस रोज़े क़ियामत इस का सिला अ़त़ा फ़रमाऊंगा (तारीख़े बग़दाद)

‏एक और रिवायत में फ़रमाया: जिसे पसन्द हो कि उसकी उ़म्र में बरकत हो, अल्लाह तआ़ला उसे अपनी दी हुई नेअ़्मत से बेहतर-मन्द करे तो उसे लाज़िम है कि मेरे बा’द मेरे अहले बैत से अच्छा सुलूक करे । जो ऐसा न करे, तो उस की उ़म्र की बरकत उड़ जाये और क़ियामत में मेरे सामने काला मुॅंह ले कर आये । (कंज़ुल उ़म्माल)

قائد ملت حضرت عسجد رضا قادری قبلہ مد ظلہ العالی کی وال سے۔

 

 

امام شافعی نے فرمایا:ـ

یَا آلَ بَیْتِ رَسُوْلِ اللّٰهِ حُبُّکُمْ
فَرْضٌ مِّنَ اللّٰهِ فِی الْقُرْآنِ اَنْزَلَهُ

’’اے اہل بیت رسول تمہاری محبت اللہ تعالیٰ نے قرآن میں فرض کردی ہے اور اس کا حکم قرآن میں نازل ہوا ہے۔‘‘

یَکْفِیْکُمْ مِنْ عَظِیْمِ الْفَخْرِاَنَّکُمْ
مَنْ لَمْ یُصَلِّ عَلَیْکُمْ لَا صَلاَة لَهُ

’’اے اہل بیت تمہاری عظمت اور تمہاری شان اور تمہاری مکانت کی بلندی کے لئے اتنی دلیل کافی ہے کہ جو تم پر درود نہ پڑھے اس کی نماز نہیں ہوتی۔‘‘

𝒩𝒶𝒶𝓉 𝒜𝒸𝒶𝒹ℯ𝓂𝓎

 

شہدا ئے کربلا کو ایصالِ ثواب کیجئے:

عاشورا کے دن نواسۂ رسول،جگر گوشۂ بتول،امامِ عالی مقام،حضرت سیِّدُنا امام حسین رضی اللہ عنہ نےاپنے رُفَقا (ساتھیوں) کے ہمراہ گلشنِ اسلام کی آبیاری کی خاطراپنی جان کا نذرانہ پیش کیا، لہٰذا ہمیں اس دن شہدائے کربلا کے ایصالِ ثواب کے لئے قراٰن خوانی، ذِکْر و دُرُوْد اور نذر ونیاز کا بھی اہتمام کرنا چاہئے۔

𝒩𝒶𝒶𝓉 𝒜𝒸𝒶𝒹ℯ𝓂𝓎

 

रमज़ान के बाद सब से अफ़ज़ल रोज़ा

हज़रत अबू हुरैरह रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि रसूले रहमतो बरकत सल्लल्लाहु तआला अलैहि व आलिही वसल्लम ने फ़रमाया रमजान शरीफ़ के बाद अफ़जल रोजा अल्लाह तआला का महीना मुहर्रम शरीफ़ में आशूरा का रोजा है और फर्ज नमाज के बाद अफजल नमाज़ रात की नमाज यानी तहज्जुद की नमाज है।
(मुस्लिम शरीफ, निश्कात शरीफ, रा. 171 )

9 मुहर्रम और 10 मुहर्रम दोनों दिन रोज़ा रखा जाये, एक और बात जिन लोगों का रमज़ान का कोई भी रोज़ा कभी का भी छूटा हुआ हो तो वो नियत रमज़ान के क़ज़ा की ही करें इस तरह उनका रमज़ान का रोज़ा भी अदा हो जायेगा और मौला ने चाहा तो मुहर्रम के दिन रोज़ा रखने का भी सवाब पायेंगे

ऐ ईमान वालो ! यौमे आशूरा यानी दस मुहर्रम शरीफ़ बड़ा अजीम दिन है उस दिन का रोजा रमज़ान शरीफ़ के बाद सबसे अफ़ज़ल रोजा है, अल्लाह तआला हमें भी उस अजीम और बरकत व रहमत वाले दिन तमाम खेल तमाशों की गलत रस्मों से बचाए और दस गुहर्रम शरीफ के बरकत वाले दिन अदब व एहतिराम के साथ रोजा रखने की और इबादतों में मशगूल रहने की तौफीक नसीब फरमाए। आमीन सुम्मा आमीन।
(अनवारूल बयान जिल्द 1 सफा 264)

मसलक ए आला हज़रत पे कायम रहो
ज़िंदगी दी गई है इसी के लिए

मसलक ए आला हजरत जिंदाबाद
हुजूर ताजुशशारिया जिंदाबाद
हुजूर कायदे मिल्लत जिंदाबाद

HAM HAI BAREILLY WALE

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