phoolon ki sej meri har ek rah guzar me hai naat lyrics

फूलों की सेज मेरी हर एक रह गुज़र में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

ना हो आराम जिस बीमार को सारे ज़माने से
उठा ले जाए थोड़ी खाक़ उनके आस्ताने से

रहमत फ़रिश्ते लाते रहेंगे हर एक पल
बरकत गुल खिलाते रहेंगे हर एक पल

खाक़ ए दरे रसूल अगर तेरे घर में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

नूर के चश्मे लहराये दरिया बहे
उंगलियों की करामत पे लाखों सलाम

उट्ठी जो उनकी उंगली तो क्या क्या ना कर दिया
सूरज को फेरा चांद को दो टुकड़े कर दिया

उसका निशान आज भी देखो क़मर में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

भीनी सुहानी सुब्हो की ठन्डक जिगर की है
कलियां खिलीं दिलों की हवा ये किधर की है

रेशम सी हैं हवाएं फ़ज़ा मुश्कवार है
तैबा की जुस्तजू में अजब ही खुमार है

लगता है जैसे खुल्द मेरी हर डगर में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

फूलों की सेज मेरी! हर एक रह गुज़र में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

अल्लाह सबसे आला है फिर मुस्तफ़ा की ज़ात
दोनों जहां में ऊंची है मेरे नबी की बात

फैला हुआ जो नूर ये शाम ओ सहर में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

फूलों की सेज मेरी हर एक रह गुज़र में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

मेरे तसव्वुरात का आलम ना पूछिये
क्यूँ हो गई है आंख मेरी नम ना पूछिये

सज्जाद मस्त नात ए शहे बहरोबर में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

फूलों की सेज मेरी हर एक रह गुज़र में है
मैं हूं सफ़र में गुंम्बदे खज़रा नज़र में है

Written By Sajjad Nizami (Marhoom)

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