Ghaus-e-Azam Ba-Man-e-Be-Sar-o-Saman Madade Lyrics (All Versions)

Ghaus-e-Azam Ba-Man-e-Be-Sar-o-Saman Madade Lyrics (All Versions)

“ग़ौस-ए-आज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे” एक ऐसा इस्तिग़ासा (सहायता के लिए पुकार) है जो हर उस सुन्नी मुसलमान की ज़बान पर रहता है जिसे वलियों के सरदार, हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी ‘ग़ौस-ए-आज़म’ (रहमतुल्लाह अलैह) से अक़ीदत है। इस कलाम के साथ अक्सर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान की लिखी मनक़बत “वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा” को मिलाकर पढ़ा जाता है, जिससे इसकी रूहानियत और बढ़ जाती है।

इस पेज पर आपको फ़ारसी इस्तिग़ासा और उर्दू मनक़बत, दोनों के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे, साथ ही इनसे जुड़ी पूरी जानकारी भी शामिल है।

कलाम की जानकारी (Kalam Information Table)

 

फीचर (Feature)विवरण (Details)
कलाम-ए-अव्वल (पहला)ग़ौस-ए-आ’ज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे (इस्तिग़ासा)
शायर (Poet)हम्ज़ा ऐनी मारहरवी (Hamza Aini Marhravi)
कलाम-ए-दोम (दूसरा)वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा (मनक़बत)
शायर (Poet)इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी
मशहूर नात-ख़्वाँओवैस रज़ा क़ादरी, डॉ. निसार अहमद मारफ़ानी

Full Manqabat & Istighasa Lyrics

Part 1: Ghaus-e-Azam Ba-Man-e-Be-Sar-o-Saman (Persian)

Roman: Gaus-e-Azam ba-man-e-be-sar-o-saamaa’n madade,
Qibla-e-deen madade, Kaaba-e-imaan madade.

हिन्दी: ग़ौस-ए-आज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे,
क़िब्ला-ए-दीं मददे, काबा-ए-ईमाँ मददे।

Part 2: Waah! Kya Martaba, Aye Ghaus! Hai Baala Tera (Urdu)

Roman: Waah! kya martaba, aye Ghaus! hai baala tera,
Unche unchon ke saron se qadam aala tera.

Sar bhala kya koi jaane ki hai kaisa tera,
Auliya malte hain aankhein woh hai talwa tera.

Kya dabe jis pe himayat ka ho panja tera,
Sher ko khatre mein laata nahin kutta tera.

Tu hai woh Ghaus ki har Ghaus hai shaida tera,
Tu hai woh Ghais ki har Ghais hai pyaasa tera.

हिन्दी: वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा,
ऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आ’ला तेरा।

सर भला क्या कोई जाने कि है कैसा तेरा,
औलिया मलते हैं आँखें वो है तल्वा तेरा।

क्या दबे जिस पे हिमायत का हो पंजा तेरा,
शेर को ख़तरे में लाता नहीं कुत्ता तेरा।

तू है वो ग़ौस कि हर ग़ौस है शैदा तेरा,
तू है वो ग़ैस कि हर ग़ैस है प्यासा तेरा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

Q1. “ग़ौस-ए-आज़म ब-मन-ए-बे-सर-ओ-सामाँ मददे” का क्या मतलब है?

यह एक फ़ारसी वाक्य है जिसका मतलब है: “ऐ ग़ौस-ए-आज़म! मुझ बे-सहारा और बे-आसरा की मदद फ़रमाइए।”

Q2. यह कलाम किसकी शान में है?

यह दोनों कलाम वलियों के सरदार, पीरान-ए-पीर, हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) की शान में लिखे गए हैं, जिन्हें ग़ौस-ए-आज़म और ग़ौस-ए-पाक के लक़ब से याद किया जाता है।

ज़रूरी लिंक्स (Important Links)

  • YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह कलाम सुनें।
  • शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
  • किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।

 

 

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