चल दिए तुम आँख में अश्कों का दरिया छोड़ कर
रंज-ए-फ़ुरक़त का हर इक सीने में शोला छोड़ कर
लज़्ज़त-ए-मय ले गया वोह जाम-ओ-मीना छोड़ कर
मेरा साक़ी चल दिया ख़ुद मय को तिश्ना छोड़ कर
हर जिगर में दर्द अपना मीठा मीठा छोड़ कर
चल दिए वोह दिल में अपना नक़्श-ए-वाला छोड़ कर
आलम-ए-बाला में हर सू मरहबा की गूँज थी
चल दिए जब तुम ज़माने भर को सूना छोड़ कर
मौत-ए-आलिम मौत-ए-आलम है यक़ीनन बे-गुमाँ
रूह-ए-आलम चल दिया आलम को मुर्दा छोड़ कर
मुत्तक़ी बन कर दिखाए इस ज़माने में कोई
एक मेरे मुफ़्ती-ए-आज़म का तक़्वा छोड़ कर
ख़्वाब में आ कर दिखाओ हम को भी ऐ जाँ कभी
कौन सी दुनिया बसाई तुम ने दुनिया छोड़ कर
एक तुम दुनिया में रह कर तारिक-ए-दुनिया रहे
रह के दुनिया में दिखाए कोई दुनिया छोड़ कर
उस का ऐ शाह-ए-जँमा सारा ज़माना हो गया
जो तुम्हारा हो गया सारा ज़माना छोड़ कर
रहनुमाई-ए-राह-ए-जन्नत है तेरा नक़्श-ए-क़दम
राह-ए-जन्नत तय न होगी तेरा रास्ता छोड़ कर
हो सके तो देख अख़्तरؔ बाग़-ए-जन्नत में उसे
वोह गया तारों से आगे आशियाना छोड़ कर