जिस को देखो वो नज़र आता है दीवाना तिरा
वाह क्या अंदाज़ है ऐ चश्म-ए-मस्ताना तिरा
ऐ हसीं जल्वा है हर-सू बे-हिजाबाना तिरा
ज़र्रा ज़र्रा कह रहा है मुझ से अफ़्साना तिरा
गुल तिरे गुलशन है तेरा सब बहारें हैं तेरी
आशियान-ओ-बर्क़ सब कहते हैं अफ़्साना तिरा
लुत्फ़ उस का है ख़ुमार उस का है मस्ती उस की है
पी लिया जिस ने अज़ल के रोज़ पैमाना तिरा
अब कमी क्या है मिरे साक़ी पिलाए जा मुझे
शीशा तेरा मय तिरी है जाम-ओ-मय-ख़ाना तिरा
तू ने कुछ ऐसी पिलाई ऐ निगाह-ए-चश्म-ए-दोस्त
रोज़-ए-अव्वल से तिरा ‘क़ैसर’ है मस्ताना तिरा