Tera Faiz Jis Par Huva Gause Azam Lyrics

या ग़ौसे आज़म जीलानी कव्वाली हिन्दी में लिखी हुई
Ya Ghaus e Aazam Jilani Lyrics In Hindi

Singer Tahir Chishti
Writer: Hazrat S Qadri

 

रुत़बा है बे-शक ला-सानी
तुम हो महबूब-ए-सुब्हानी
रब की जानिब से है हासिल
सारे वलियों की सुल्तानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

करम कर दो खुदारा ग़ौस ए आज़म शाहे जीलानी
बने बिगड़ा मुक़द्दर दूर हो जाए परेशानी

सदा करते हो बिगड़े हाल वालों पर मेहरबानी
सुना है मुश्किलों में जब कोई फ़रियाद करता है
तो मुश्किल दूर हो जाती है जिस दम याद करता है
ग़मो आलाम से आजाद करते हो बा-आसानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

करामत के धनी हो हर ज़बां पे ये क़सीदा है
करम करते हो सब पर हर किसी का ये अक़ीदा है
मसीहा बेकसों के आप हो या ग़ौस ए समदानी
ग़ुलामी का शरफ़ जिसको मिला वो हो गया कामिल
भटक सकता नहीं जो सिलसिले में हो गया दाख़िल
हमेशा आप करते हो मुरीदों की निगेहबानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

भंबर में फ़स नहीं सकती अक़ीदत मन्द की कश्ती
तलातुम ख़ेज़ मौजों से गुज़रती है ब-सद मस्ती
हिफ़ाज़त करती रहती है सदा मौजों की तुग़यानी
यक़ीनन रौज़ा ए अक़्दस पे जो बीमार जाता है
शिफ़ायाबी हुआ करती है वो सरशार आता है
मुआलिज हैं यक़ीनन आप जिस्मानी और रुहानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

लगाओ अल-मदद या ग़ौस का नारा अक़ीदत से
पुकारो मुश्किलों में ग़ौस ए आज़म को मोह़ब्बत से
बचाते हैं मुसीबत से हमेशा पीरे ला-सानी
बनाया चोर को अब्दाल प्यारे ग़ौस ए आज़म ने
जहाँ में कर दिया खुशहाल प्यारे ग़ौस ए आज़म ने
निराली शान वाले हैं अ़त़ा करते हैं सुल्तानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

ज़बां से कुम्बि-इज़्नी कह के मुर्दों को जिलाया है
ब-फ़ज़्ले रब जो नामुमकिन था मुमकिन कर दिखाया है
मिली है दस्तरस ये आपको महबूब ए सुब्हानी
समझ से बालातर है ग़ौस ए आज़म आपकी हस्ती
निकाली पल में बारह साल से डूबी हुई कश्ती
सदाएँ दे रहीं हैं आज भी दरिया की तुग़यानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

सलासिल हैं सभी ज़ेरे असर सब फ़ैज़ पाते हैं
अदब से औलिया अल्लाह के सब सर झुकाते हैं
क़दम है सबकी गर्दन पर सभी हैं ज़ेरे सुल्तानी
अ़त़ा हो ऐश को या सय्यदी हसनैन का सदक़ा
यही फ़रियाद है सर पर रहे बस आपका साया
मुरादें दिल की बर आयें, करम हो क़ुतुब ए रब्बानी

 

या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी
या ग़ौस-ए-आज़म जीलानी

 

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