स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
वो जो ना थे तो कुछ ना था, वो जो ना हो तो कुछ ना हो
जान है वो जहाँ की, जान है तो जहाँ है
आमद-ए-मुस्तफ़ा से है फूला फला चमन चमन
आई बहार हर तरफ़ खिलने लगा चमन चमन
आमद-ए-मुस्तफ़ा हुई रोशन ज़माना हो गया
जिन के हुज़ूर हो गए उनका ज़माना हो गया
हम भी मदीने जायेंगे आज नहीं तो कल सही
आक़ा हमें बुलायेंगे आज नहीं तो कल सही
गलियों में घूम घूम कर ख़ाक-ए-मदीना चूम कर
नज़रों से हम लगायेंगे आज नहीं तो कल सही
गलियों में झूम झूम कर ख़ाक-ए-मदीना चूम कर
नात-ए-नबी सुनायेंगे आज नहीं तो कल सही
देखा जो उनको बाँटते मैंने भी बढ़ के शौक़ से
दस्त-ए-अता के सामने दस्त-ए-तलब बढ़ा दिया
नो मैटर इस तयबा फ़ार अवे, वी हैव टू गो एंड विज़िट वन डे
आक़ा विल कॉल अस वन डे, मुर्शिद विल शो द वे वन डे
हाल-ए-दिल सुनायेंगे आज नहीं तो कल सही
बिगड़ी अपनी बनायेंगे आज नहीं तो कल सही
हम ने तो मान ही लिया कि आप हैं जान-ए-काएनात
नज्दी भी मान जायेंगे आज नहीं तो कल सही
भाग 2: नूर-ए-निगाह-ए-आमिना वर्शन (रियाज़)
नूर-ए-निगाह-ए-आमिना शौकत-ओ-शान-ए-फ़ातिमा
तेरे ही दम क़दम से है रौनक़-ए-बज़्म-ए-आयशा
तुझ सा कोई शकील है और न कोई जमील है
तेरे ही दम का पासबाँ हज़रत-ए-जिब्रईल है
तुझ से ज़माना शाद-शाद सब के दिलों में तेरी याद
तेरी जानिब से कभी कोई गया न मुराद
अपने दुखों की दास्ताँ ले के रियाज़ ख़ाकिस्ता जाँ
आया बहुत ये दूर से दर पे तेरे शाह-ए-शाहाँ
भाग 3: हम भी मदीना जायेंगे वर्शन (अंजुम)
हम भी मदीना जायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
आक़ा हमें बुलायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
दिल मेरा बेक़रार है ग़म दिल पे बेशुमार है
रंजो अलम बतायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
दुनिया ने जो भी ग़म दिया हम ने ख़ुशी से सह लिया
आक़ा को हम सुनायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
जो कुछ भी माँगना है वो आक़ा से माँग लेंगे हम
माँगी मुराद पायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
दर पे किसी के जाएँ क्यों दस्त-ए-तलब बढ़ाएं क्यों
सब कुछ नबी से पायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
दौलत नहीं की जा सकूँ दर्द-ए-जिगर दिखा सकूँ
लेकिन हुज़ूर आयेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
आक़ा हमें बुलायेंगे अंजुम मदीना जायेंगे
नात उन्हें सुनायेंगे आज नहीं तो कल ज़रूर
भाग 4: सुफ़ियाना वर्शन
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
छेड़ के साज़-ए-ला इलाह मस्त बना गया कोई
और दुनिया जो महवे ख़्वाब थी आके जगा गया कोई
स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
औलिया अम्बिया तमाम पढ़ते दुरूद सुब्हो शाम
और ख़ुद ख़ुदा का है ये काम
स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
बे-मिस्ल नूर-ए-अहमदी ऐसा नहीं कोई नबी
और पढ़ते फ़रिश्ते हैं सभी
स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
तेरी अदा अदा ऐ हक़, तेरी रज़ा रज़ा ऐ हक़
और वही-ए-ख़ुदा तेरा कलाम, तुझ पर दुरूद और सलाम
स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
बख़्शी गई है सब ख़ता तौबा का दर भी है खुला
और आदम ने जब कि ये पढ़ा
स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
भाग 5: कच्छी सलाम (सैयद अहमद शाह बुखारी)
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला ह़बीबेना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला करीमेना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
यासीनो-ताहा, वद्दोहा, लौलाक आंजी शान में
क़ादिर करम आंते केयो केडो फज़ल फ़ुरक़ान में
सरवर आंजियूं सिफतु करियां एडो जोर नाय ज़बान में
वाजिद आंजियूं वस्फूं वडियूं क़ादिर कयूं क़ुरआन में
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
सूरज, चंधर, तारा, कतियूं आंजे नूर से भरपूर थेया
अर्श, कुर्सी, आसमां आंजे नूर से माअ़मूर थेया
यहूदी, नसारा, पारसी आंजे धीन ते मजबूर थेया
जाड़, डुंगर ने जानवर आंजो मों डिसी कलमु पड़ेया
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
मेअराज लय आंके मुस्तफ़ा क़ादिर जडें कोठाएयो
आंजे अचण लय आसमां सभनी के सिणगारयो
निरमल आंके नालैन सा अर्शे-उला ते चाड़यो
क़ादिर केया आंसे कलाम रूबरू ग़ालायो
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
बरकत से आंजी नूह जो बेड़ो बुडण खा पार थेयो
आड़ा में इब्राहिम लय टांढो ठरी गुलज़ार थेयो
मूसा नबी जी नील मां लश्कर लंगाए पार केयो
आंजी मदद से मुस्तफ़ा अय्यूब जो आजार वेयो
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
चिरजी चंदर कुरबान थेयो आंजे इशारे या नबी
मौला अली जी नमाज़ लय सूरज के वारे या नबी
अंगड़ियन मिंजा पाणी कढी प्यासा पियारे या नबी
मुरदा पुतर जाबिर संधा पल में जियारे या नबी
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
बागे-यमन में शाहे-हुदा आंजा पैर पाणी मिंज पेया
बरकत से आंजे बाग में तरो-ताजा मेवा पेया
खुश्बू, महेक, दमक सां गुलफुल खेली गुलज़ार थेया
कलियुं, चमेलियुं, मोगरा, फलफुल पसी कलमु पड़ेया
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
जंगे-बदर में बासफा मौला मलायक मोकलेया
आंजी मदद लय या नबी अफ़लाक जा लश्कर उतरेया
हुदेबिया में मन्ज़िल मथे असहाब जडे प्यासा थेया
आक़ा आंजी अंगड़ियन मिंजा पाणी जा चश्मा वया
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
दीदार दिलबर जो डेसां तेसिं ऐ ख़ुदा जग में जियां
हुजरो मुहम्मद मुस्तफ़ा तेंजी चांठ के चोमियुं डियां
माणिक मुनारा मीर जा तेंता साह के सदको करियां
रोजो रसूले-पाक जो तेंता जान जिन्धड़ो गोरियां
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
अर्ज अहमद शाह जा सारे सोणो ऐ मुस्तफा
सकरात छल सोखी थिये मिले हुस्ने-खातेमा
इश्क में आक़ा आंजे पलपल खणा मुजा पसा
कलमु पड़ी कायम करियां तडे रूह थिये तन खां जुदा
स़ल्ले अ़ला नबिय्येना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
स़ल्ले अ़ला शफ़ीएना, स़ल्ले अ़ला मुह़म्मदिन
Salle ala nabi ye na sale ala Mohammadin
Salle ala shafiye na sale ala Mohammadin
Ham bhi Madine jaye gei ajj nahi to kal sahi
Aqa hamme bulaye gei ajj nahi to kal sahi
Galiyoun mein ghum ghum kar Khakhe Madina chum kar
Nazroun se ham lagaye gei aaj nahi to kal sahi
Dekha jo Un ko baanethe main ne bhi bar ke shouk se
Daste ata ke samne daste talab barha diya
Aamade Mustafa hoyi roshan zamana ho geya
Jin ke Huzoor ho geye un ka zamana ho geya
Haal dil sunayein gei aaj nahi to kal sahi
Bighri apni banaye gei aaj nahi to kal sahi