“Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola” (या रब तू है सबका मौला) एक लोकप्रिय नात/मनक़बत है, जिसका मतलब है “हे रब, तू सबका मालिक है”, और इसके बोल अल्लाह की बड़ाई और अपने पीर-ओ-मुर्शिद (खासकर Gazi Baba) से मदद मांगने पर केंद्रित होते हैं, जिसमें हाजिर होने, मदीना देखने और दर पर हाज़िरी लगाने की फरियाद होती है.
यहां कुछ प्रसिद्ध पंक्तियाँ दी गई हैं जो इस नात में अक्सर आती हैं:
Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola (या रब तू है सबका मौला)
Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola (x2)
Mere Peer Ka Sadqa De De,
Mere Peer Ka Sadqa De De,
Mujhko Dar Pe Bula Le.
Mere Peer Ka Sadqa De De
Mujhko Dar Pe Bula Le,
Dar Pe Bula Le,
Aakhon Se Dekhoon Madina,
Aakhon Se Dekhoon Madina,
Ek Baar Mujhe Dikha De.
Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola (x2)
Mere Peer Ka Sadqa De De.
Jab Jaan Nikle, Jab Jaan Nikle
Jab Jaan Nikle, Jab Jaan Nikle,
Kuchh Kaam Na Aayega,
Jab Jaan Nikle, Jab Jaan Nikle,
Kuchh Kaam Na Aayega,
Mere Peer Ka Sadqa De De,
Mujhko Dar Pe Bula Le.
Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola (x2)
Mere Peer Ka Sadqa De De.
भावार्थ (Meaning):
Ya Rab Tu Hai Sab Ka Mola: हे अल्लाह, तू ही सबका मालिक और पालनहार है।
Mere Peer Ka Sadqa De De: मेरे मुर्शिद (Gazi Baba) के सदके में (उनकी बरकत से) मुझे वो चीज़ अता कर।
Mujhko Dar Pe Bula Le: मुझे अपने दर (दरगाह) पर बुला ले।
Aakhon Se Dekhoon Madina: अपनी आँखों से मदीना (पैगंबर मोहम्मद साहब का शहर) देखना चाहता हूँ।
Ek Baar Mujhe Dikha De: एक बार मुझे वह नज़ारा दिखा दे।
यह नात Gazipur के Gazi Baba (ग़ाज़ी बाबा) के नाम से मशहूर है और उनके चाहने वाले इसे बहुत पढ़ते और सुनते हैं.