Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera Lyrics (4 Languages)
“वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा, ऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आ’ला तेरा”, यह सिर्फ़ एक मनक़बत का मिसरा नहीं, बल्कि ग़ौस-ए-आज़म, हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) की अज़मत का वो समुंदर है जिसे इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी ने अपनी क़लम से कागज़ पर उतारा है।
यह शाहकार कलाम आला हज़रत के मशहूर-ओ-मारूफ़ नातिया दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” की ज़ीनत है। इस मनक़बत का हर शेर ग़ौस-ए-पाक की शान, उनके रुत्बे और उनके मक़ाम को बयान करता है। इस पेज पर आपको इस मुबारक मनक़बत के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
मनक़बत की जानकारी (Manqabat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किसकी शान में | हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी ‘ग़ौस-ए-आज़म’ |
| मशहूर नात-ख़्वाँ | ओवैस रज़ा क़ादरी, और कई अन्य |
“Wah Kya Martaba Ae Ghous Hai Bala Tera” Full Manqabat Lyrics
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
वाह! क्या मर्तबा, ऐ ग़ौस! है बाला तेरा,
ऊँचे ऊँचों के सरों से क़दम आ’ला तेरा।सर भला क्या कोई जाने कि है कैसा तेरा,
औलिया मलते हैं आँखें वो है तल्वा तेरा।क्या दबे जिस पे हिमायत का हो पंजा तेरा,
शेर को ख़तरे में लाता नहीं कुत्ता तेरा।तू हुसैनी-हसनी क्यूँ न मुहिय्युद्दीं हो,
ऐ ख़िज़र! मज्म’-ए-बहरैन है चश्मा तेरा।बद सही, चोर सही, मुजरिम-ओ-नाकारा सही,
ऐ वो कैसा ही सही है तो, करीमा! तेरा।फ़ख़्र-ए-आक़ा में, रज़ा! और भी इक नज़्म-ए-रफ़ी’,
चल लिखा लाएँ सना-ख़्वाँनों में चेहरा तेरा।
Roman English Lyrics
Waah! kya martaba, aye Ghaus! hai baala tera,
Unche unchon ke saron se qadam aala tera.Sar bhala kya koi jaane ki hai kaisa tera,
Auliya malte hain aankhein woh hai talwa tera.Kya dabe jis pe himayat ka ho panja tera,
Sher ko khatre mein laata nahin kutta tera.Tu Hussaini-Hasani kyun na Muhiyuddeen ho,
Aye Khizar! majma’-e-bahrain hai chashma tera.Bad sahi, chor sahi, mujrim-o-naakara sahi,
Aye woh kaisa hi sahi hai to, Kareema! tera.Fakhr-e-aaqa mein, Raza! aur bhi ik nazm-e-rafi’,
Chal likha laayein sana-khwaanon mein chehra tera.
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
واہ! کیا مرتبہ اے غوث ہے بالا تیرا
اُونچے اُونچوں کے سروں سے قدم اعلیٰ تیراسر بھلا کیا کوئی جانے کہ ہے کیسا تیرا
اولیا ملتے ہیں آنکھیں وہ ہے تلوا تیراکیا دبے جس پہ حمایت کا ہو پنجہ تیرا
شیر کو خطرے میں لاتا نہیں کتا تیراتو حسینی حسنی کیوں نہ محی الدیں ہو
اے خضر! مجمع بحرین ہے چشمہ تیرابد سہی، چور سہی، مجرم و ناکارہ سہی
اے وہ کیسا ہی سہی ہے تو کریما! تیرافخرِ آقا میں رضاؔ اور بھی اک نظمِ رفیع
چل لکھا لائیں ثنا خوانوں میں چہرہ تیرا
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
વાહ! ક્યા મર્તબા, ઐ ગૌસ! હૈ બાલા તેરા,
ઊંચે ઊંચોં કે સરોં સે કદમ આ’લા તેરા.સર ભલા ક્યા કોઈ જાને કિ હૈ કૈસા તેરા,
ઔલિયા મલતે હૈં આંખેં વો હૈ તલવા તેરા.ક્યા દબે જિસ પે હિમાયત કા હો પંજા તેરા,
શેર કો ખતરે મેં લાતા નહીં કુત્તા તેરા.તૂ હુસૈની-હસની ક્યું ન મુહિઉદ્દીં હો,
ઐ ખિઝર! મજ્મ’-એ-બહરૈન હૈ ચશ્મા તેરા.બદ સહી, ચોર સહી, મુજરિમ-ઓ-નાકારા સહી,
ઐ વો કૈસા હી સહી હૈ તો, કરીમા! તેરા.ફખ્ર-એ-આકા મેં, રઝા! ઔર ભી ઇક નઝ્મ-એ-રફી’,
ચલ લિખા લાએં સના-ખ્વાનોં મેં ચેહરા તેરા.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस मनक़बत का शायर कौन है?
इस शाहकार मनक़बत के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. यह मनक़बत किसकी शान में लिखी गई है?
यह मनक़बत वलियों के सरदार, पीरान-ए-पीर, हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी (रहमतुल्लाह अलैह) की शान में लिखी गई है, जिन्हें ग़ौस-ए-आज़म और ग़ौस-ए-पाक के लक़ब से याद किया जाता है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह मनक़बत सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।