ज़मीनो-ज़मां तुम्हारे लिए
मकीनो-मकां तुम्हारे लिए
चुनीनो-चुनां तुम्हारे लिए
बने दोनों जहां तुम्हारे लिए
दहन में ज़बां तुम्हारे लिए
बदन में है जां तुम्हारे लिए
हम आए यहां तुम्हारे लिए
उठें भी वहां तुम्हारे लिए
कलीम ओ नजी, मसीह ओ सफ़ी
ख़लील ओ रज़ी, रसूल ओ नबी
अतीक़ ओ वसी, ग़नी ओ अली
सना की ज़बां तुम्हारे लिए
तुम्हारी चमक, तुम्हारी दमक
तुम्हारी झलक, तुम्हारी महक
ज़मीनो-फ़लक, सिमाक ओ समक
में सिक्का निशां तुम्हारे लिए
ये शम्स ओ क़मर ये शाम ओ सहर
ये बर्ग ओ शजर ये बाग़ ओ समर
ये तेग़ ओ सिपर ये ताज ओ कमर
ये हुक्मे-रवां तुम्हारे लिए
ये फ़ैज़ दिए वो जूद किए
कि नाम लिए ज़माना जिए
जहाँ ने लिए तुम्हारे दिए
ये इकरामियां तुम्हारे लिए
सहाबे-करम रवाना किए
कि आब-ए-निअ़म ज़माना पिए
जो रखते थे हम वो चाक सिए
ये सत्रे-बदन तुम्हारे लिए
अताए-अरब, जलाए-करब
फ़ुयूज़े-अजब बग़ैर तलब
ये रहमते-रब्ब है किस के सबब
ब-रब्बे-जहाँ तुम्हारे लिए
न जिन्न ओ बशर कि आठों पहर
मलइक़ा दर पे बस्ता कमर
न जिब्हा ओ सर, कि क़ल्ब ओ जिगर
हैं सज्दा कुनां तुम्हारे लिए
जिनां में चमन चमन में समन
समन में फबन फबन में दुल्हन
सज़ाए-मिहन पे ऐसे मिनन
ये अम्नो-अमां तुम्हारे लिए
ख़लील ओ नजी मसीह ओ सफ़ी
सभी से कही कहीं भी बनी
ये बे-ख़बरी कि ख़ल्क़ फिरी
कहाँ से कहाँ तुम्हारे लिए
इशारे से चांद चीर दिया
छुपे हुए ख़ुर को फेर लिया
गए हुए दिन को अस्र किया
ये ताबो-तवां तुम्हारे लिए
सबा वो चले कि बाग़ फले
वो फूल खिलें कि दिन हों भले
लिवा के तले सना में खुले
रज़ा की ज़बां तुम्हारे लिए