ब गिरदाबे बला उफतादा कश्ती
ज़ईफाने शिकिस्ता रा तो पुश्ती
बहक्के ख्वाजा ए उस्माने हारूनी
मदद कुन या मोईनुद्दीन चिश्ती
उर्स मुबारक हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी चिश्ती रज़ि•
पीरो मूर्शीद हजरत ख्वाजा गरीब नवाज रज़ि•
“Ba Girdab E Bala Uftada Kashti” (ब गिरदाबे बला उफतादा कश्ती) एक प्रसिद्ध सूफी कलाम (भजन) है, जिसका अर्थ है “मुसीबतों के भंवर में फँसी नाव, कमजोरों और टूटे दिलों को सहारा देने वाले, ख्वाजा उस्मान हारूनी के नाम पर, मदद करो, ऐ मोईनुद्दीन चिश्ती!” यह दुआ है जो गरीब नवाज हज़रत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.) से मदद मांगने के लिए पढ़ी जाती है, खासकर उर्स (दरगाह) के मौके पर, और यह रूबई (चार पंक्तियों का शेर) ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (रह.) से भी जुड़ी है.
Lyrics (फ़ारसी/उर्दू लिपि में):
Ba Girdab E Bala Uftada Kashti
Zaeefane Shikasta Raa Too Pushti
Ba Haqqe Khwaja Usman-e-Harooni
Madad Kun Ya Mueenuddin Chishti
अर्थ (Meaning):
Ba Girdab E Bala Uftada Kashti (ब गिरदाबे बला उफतादा कश्ती): मुसीबतों के भंवर में नाव फँस गई है.
Zaeefane Shikasta Raa Too Pushti (ज़ईफाने शिकिस्ता रा तो पुश्ती): तुम कमजोरों और टूटे दिलों को सहारा देते हो (यानी, तुम ही सहारा हो).
Ba Haqqe Khwaja Usman-e-Harooni (बहक्के ख्वाजा ए उस्माने हारूनी): ख्वाजा उस्मान हारूनी (रह.) के वास्ते/नाम पर.
Madad Kun Ya Mueenuddin Chishti (मदद कुन या मोईनुद्दीन चिश्ती): मदद करो, ऐ मोईनुद्दीन चिश्ती (रह.).
यह कलाम अक्सर गरीब नवाज की शान में गाया जाता है और उनकी दरगाह (अजमेर शरीफ) से जुड़ा हुआ है, जो सूफीवाद और चिश्ती सिलसिले की महत्वपूर्ण पहचान है.