Aasiyo Ko Dar Tumhara Mil Gaya Lyrics (Hindi, Urdu & Roman)
“आसियों को दर तुम्हारा मिल गया” उस्ताद-ए-ज़मन, हज़रत हसन रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) का लिखा हुआ एक बेहद मक़बूल और दिल को छू लेने वाला नातिया कलाम है। इस नात में शायर ने हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बारगाह को गुनहगारों और बे-ठिकानों के लिए सबसे बड़ी पनाहगाह क़रार दिया है।
यह कलाम हज़रत हसन रज़ा ख़ान के नातिया दीवान **”ज़ौक़-ए-नात”** की ज़ीनत है। इस पेज पर आपको इस रूहानी नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे, साथ ही इससे जुड़ी पूरी जानकारी भी शामिल है।

नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | आसियों को दर तुम्हारा मिल गया |
| शायर (Poet) | हज़रत हसन रज़ा ख़ान बरेलवी |
| किताब (Book) | ज़ौक़-ए-नात (Zauq-e-Naat) |
| मुख्य विषय (Theme) | नबी-ए-करीम का दर, गुनाहगारों के लिए पनाहगाह, मदीना की अज़मत |
“Aasiyo Ko Dar Tumhara Mil Gaya” Full Naat Lyrics
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
आसियों को दर तुम्हारा मिल गया,
बे-ठिकानों को ठिकाना मिल गया।फ़ज़्ल-ए-रब से फिर कमी किस बात की,
मिल गया सब कुछ जो तैबा मिल गया।उनके दर ने सब से मुस्तग़नी किया,
बे-तलब बे-ख्वाहिश इतना मिल गया।ना-खुदाई के लिए आए हुज़ूर,
डूबतो! निकलो सहारा मिल गया।आँखें पुर-नम हो गईं सर झुक गया,
जब तेरा नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मिल गया।तेरे दर के टुकड़े हैं और मैं ग़रीब,
मुझको रोज़़ी का ठिकाना मिल गया।ऐ हसन! फिर क्यों न रीझें या जनाब,
हम को सहरा-ए-मदीना मिल गया।
Roman English Lyrics
Aasiyo ko dar tumhara mil gaya,
Be-thikano ko thikana mil gaya.Fazl-e-Rab se phir kami kis baat ki,
Mil gaya sab kuch jo Taiba mil gaya.Unke dar ne sab se mustaghni kiya,
Be-talab be-khwahish itna mil gaya.Na-khudai ke liye aaye Huzoor,
Doobto! niklo sahara mil gaya.Aankhein pur-nam ho gayi sar jhuk gaya,
Jab tera naqsh-e-kaf-e-paa mil gaya.Tere dar ke tukde hain aur main ghareeb,
Mujhko rozi ka thikana mil gaya.Aye Hasan! phir kyun na reejhein ya janab,
Hum ko sehra-e-Madina mil gaya.
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
عاصیوں کو در تمہارا مل گیا
بے ٹھکانوں کو ٹھکانہ مل گیافضلِ رب سے پھر کمی کس بات کی
مل گیا سب کچھ جو طیبہ مل گیااُن کے در نے سب سے مستغنی کیا
بے طلب بے خواہش اتنا مل گیانا خدائی کے لیے آئے حضور
ڈُوبتو! نکلو سہارا مل گیاآنکھیں پر نم ہو گئیں سر جُھک گیا
جب ترا نقشِ کفِ پا مل گیاتیرے در کے ٹکڑے ہیں اور میں غریب
مجھ کو روزی کا ٹھکانہ مل گیااے حسن! پھر کیوں نہ ریجھیں یا جناب
ہم کو صحرائے مدینہ مل گیا
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
આસિયોં કો દર તુમ્હારા મિલ ગયા,
બે-ઠિકાનોં કો ઠિકાના મિલ ગયા.ફઝલ-એ-રબ સે ફિર કમી કિસ બાત કી,
મિલ ગયા સબ કુછ જો તૈબા મિલ ગયા.ઉનકે દર ને સબ સે મુસ્તગની કિયા,
બે-તલબ બે-ખ્વાહિશ ઇતના મિલ ગયા.ના-ખુદાઈ કે લિએ આયે હુઝૂર,
ડૂબતો! નિકલો સહારા મિલ ગયા.આંખેં પુર-નમ હો ગઈ સર ઝુક ગયા,
જબ તેરા નકશ-એ-કફ-એ-પા મિલ ગયા.તેરે દર કે ટુકડે હૈં ઔર મેં ગરીબ,
મુઝકો રોઝી કા ઠિકાના મિલ ગયા.ઐ હસન! ફિર ક્યું ન રીઝેં યા જનાબ,
હમ કો સહરા-એ-મદીના મિલ ગયા.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. “आसियों को दर तुम्हारा मिल गया” नात किसने लिखी है?
यह ख़ूबसूरत नात हज़रत हसन रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखी है, जो आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के छोटे भाई और अपने वक़्त के एक बहुत बड़े शायर थे।
Q2. “आसियों” का क्या मतलब है?
“आसियों” (عاصیوں) लफ्ज़ “आसी” (عاصی) का बहुवचन (plural) है, जिसका मतलब होता है “गुनहगार” या “पापी”। शायर कह रहे हैं कि (आपकी बारगाह में आकर) गुनहगारों को पनाह मिल गई।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: इस नात को ख़ूबसूरत आवाज़ों में सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर हज़रत हसन रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
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