Pesh-e-Haq Muzhda Shafa’at Ka Lyrics (Hindi, Urdu & Roman)
“पेश-ए-हक़ मुज़्दा शफ़ाअत का सुनाते जाएँगे” उर्दू अदब के अज़ीम आलिम और आशिक़-ए-रसूल, इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) का लिखा हुआ एक शाहकार कलाम है। यह नात-ए-पाक आला हज़रत की मशहूर-ओ-मारूफ़ किताब “हदाएक़-ए-बख़्शिश” की ज़ीनत है।
इस कलाम में आला हज़रत ने रोज़-ए-महशर (क़यामत के दिन) का वो मंज़र खींचा है जब हर कोई परेशान होगा, और हमारे आक़ा व मौला, हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी गुनहगार उम्मत की बख़्शिश के लिए अल्लाह की बारगाह में शफ़ाअत (सिफारिश) फ़रमा रहे होंगे।
नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | पेश-ए-हक़ मुज़्दा शफ़ाअत का सुनाते जाएँगे |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
| मुख्य विषय (Theme) | नबी-ए-करीम की शफ़ाअत, रहमत और उम्मत से मोहब्बत |
“Pesh-e-Haq Muzhda Shafa’at Ka” Full Naat Lyrics
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
پیشِ حق مژدہ شفاعت کا سناتے جائیں گے
آپ روتے جائیں گے ہم کو ہنساتے جائیں گےدل نکل جانے کی جا ہے آہ کن آنکھوں سے وہ
ہم سے پیاسوں کے لئے دریا بہاتے جائیں گےکُشتگانِ گرمیِ محشر کو وہ جانِ مسیح
آج دامن کی ہوا دے کر جِلاتے جائیں گےوسعتیں دی ہیں خدا نے دامنِ محبوب کو
جرم کُھلتے جائیں گے اور وہ چھپاتے جائیں گےحشر تک ڈالیں گے ہم پیدائشِ مولیٰ کی دھوم
مِثل فارس نجد کے قلعے گراتے جائیں گےخاک ہوجائیں عَدُو جل کر مگر ہم تو رؔضا
دم میں جب تک دم ہے ذکر اُن کا سناتے جائیں گے
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
पेश-ए-हक़ मुज़्दा शफ़ाअत का सुनाते जाएँगे,
आप रोते जाएँगे हम को हँसाते जाएँगे।दिल निकल जाने की जा है आह किन आँखों से वो,
हम से प्यासों के लिए दरिया बहाते जाएँगे।कुश्तगान-ए-गर्मी-ए-महशर को वो जान-ए-मसीह,
आज दामन की हवा दे कर जिलाते जाएँगे।वुसअ’तें दी हैं ख़ुदा ने दामन-ए-महबूब को,
जुर्म खुलते जाएँगे और वो छुपाते जाएँगे।हश्र तक डालेंगे हम पैदाइश-ए-मौला की धूम,
मिस्ल-ए-फ़ारस नज्द के क़िले गिराते जाएँगे।ख़ाक हो जाएँ अदू जल कर मगर हम तो रज़ा,
दम में जब तक दम है ज़िक्र उन का सुनाते जाएँगे।
Roman English Lyrics
Pesh-e-Haq muzhda shafa’at ka sunate jayenge,
Aap rote jayenge hum ko hansate jayenge.Dil nikal jaane ki jaa hai aah kin aankhon se woh,
Hum se pyason ke liye dariya bahate jayenge.Kushtagaan-e-garmi-e-mehshar ko woh jaan-e-masih,
Aaj daaman ki hawa de kar jilaate jayenge.Wus’atein di hain Khuda ne daaman-e-mehboob ko,
Jurm khulte jayenge aur woh chhupate jayenge.Hashr tak daalenge hum paidaish-e-Maula ki dhoom,
Misl-e-Faras Najd ke qil’e giraate jayenge.Khaak ho jayein adoo jal kar magar hum toh Raza,
Dum mein jab tak dum hai zikr un ka sunate jayenge.
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
પેશ-એ-હક મુઝદા શફાઅત કા સુનાતે જાએંગે,
આપ રોતે જાએંગે હમ કો હંસાતે જાએંગે.દિલ નિકલ જાને કી જા હૈ આહ કિન આંખોં સે વો,
હમ સે પ્યાસોં કે લિએ દરિયા બહાતે જાએંગે.કુશ્તગાન-એ-गर्मी-ए-મહશર કો વો જાન-એ-મસીહ,
આજ દામન કી હવા દે કર જિલાતે જાએંગે.વુસઅતેં દી હૈં ખુદા ને દામન-એ-મહબૂબ કો,
જુર્મ ખુલતે જાએંગે ઔર વો છુપાતે જાએંગે.હશ્ર તક ડાલેંગે હમ પૈદાઇશ-એ-મૌલા કી ધૂમ,
મિસ્લ-એ-ફારસ નજ્દ કે કિલે ગિરાતે જાએંગે.ખાક હો જાએં અદૂ જલ કર મગર હમ તો રઝા,
દમ મેં જબ તક દમ હૈ ઝિક્ર ઉન કા સુનાતે જાએંગે.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. यह नात किसने लिखी है?
यह नात-ए-पाक चौदहवीं सदी के मुजद्दिद, इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखी है।
Q2. “मुज़्दा-ए-शफ़ाअत” का क्या मतलब है?
“मुज़्दा-ए-शफ़ाअत” का मतलब है “शफ़ाअत की ख़ुशख़बरी” या “सिफारिश की शुभ सूचना”। इस नात में शायर कह रहे हैं कि नबी-ए-करीम (स.अ.व.) अल्लाह की बारगाह में (हमारी) शफ़ाअत की ख़ुशख़बरी सुनाते जाएँगे।
Q3. यह कलाम किस किताब में मिलता है?
यह मुबारक नात आला हज़रत के मशहूर नातिया दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” (Hadaiq-e-Bakhshish) में शामिल है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: इस नात को ख़ूबसूरत आवाज़ों में सुनें।
- शायर के बारे में जानें: आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
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