Wasf-e-Rukh Unka Kiya Karte Hain Lyrics (4 Languages) | Aala Hazrat
“वस्फ़-ए-रुख़ उनका किया करते हैं, शरह-ए-वश्शम्सो दुहा करते हैं” यह एक ऐसा नातिया कलाम है जो हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शान-ए-अक़दस को क़ुरान की रौशनी में बयान करता है। इस शाहकार नात को इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी क़लम से सजाया है। यह कलाम उनके मशहूर दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” में शामिल है।
इस नात में आला हज़रत ने हुज़ूर (स.अ.व.) के चेहरा-ए-अनवर की तारीफ़ को सूरह वश्शम्स और सूरह वद्दुहा की तफ़्सीर क़रार दिया है। हर शेर में आपने नबी-ए-करीम के मुअजिज़ात (चमत्कार) और आपकी बेमिसाल अज़मत का ज़िक्र किया है। इस पेज पर आपको इस रूहानी नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | वस्फ़-ए-रुख़ उनका किया करते हैं |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
“Wasf-e-Rukh Unka Kiya Karte Hain” Full Naat Lyrics
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
وصفِ رخ اُن کا کیا کرتے ہیں شرحِ والشمس و ضحیٰ کرتے ہیں
اُن کی ہم مدح وثنا کرتے ہیں جن کو محمود کہا کرتے ہیںتو ہے خورشیدِ رسالت پیارے چھپ گئے تیری ضیا میں تارے
انبیا اور ہیں سب مہ پارے تجھ سے ہی نور لیا کرتے ہیںاپنے مولیٰ کی ہے بس شان عظیم جانور بھی کریں جن کی تعظیم
سنگ کرتے ہیں ادب سے تسلیم پیڑ سجدے میں گرا کرتے ہیںانگلیاں پائیں وہ پیاری پیاری جن سے دریائے کرم ہیں جاری
جوش پر آتی ہے جب غم خواری تشنے سیراب ہوا کرتے ہیںاپنے دل کا ہے انھیں سے آرام سونپے ہیں اپنے انھیں کو سب کام
لو لگی ہے کہ اب اس در کے غلام چارۂ دردِ رضؔا کرتے ہیں
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
वस्फ़-ए-रुख़ उनका किया करते हैं, शरह-ए-वश्शम्सो दुहा करते हैं,
उनकी हम मद्ह-ओ-सना करते हैं, जिनको महमूद कहा करते हैं।तू है ख़ुर्शीद-ए-रिसालत प्यारे, छुप गए तेरी ज़िया में तारे,
अंबिया और हैं सब मह पारे, तुझसे ही नूर लिया करते हैं।अपने मौला की है बस शान-ए-अज़ीम, जानवर भी करें जिनकी ताज़ीम,
संग करते हैं अदब से तस्लीम, पेड़ सजदे में गिरा करते हैं।उंगलियाँ पाईं वो प्यारी प्यारी, जिनसे दरिया-ए-करम हैं जारी,
जोश पर आती है जब ग़म-ख़्वारी, तश्ने सैराब हुआ करते हैं।अपने दिल का है उन्हीं से आराम, सौंपे हैं अपने उन्हीं को सब काम,
लौ लगी है कि अब इस दर के ग़ुलाम, चारा-ए-दर्द-ए-रज़ा करते हैं।
Roman English Lyrics
Wasf-e-rukh unka kiya karte hain, sharha-e-wash’shamso duha karte hain,
Unki hum madh-o-sana karte hain, jinko Mehmood kaha karte hain.Tu hai khursheed-e-risalat pyaare, chhup gaye teri ziya mein taare,
Ambiya aur hain sab meh paare, tujhse hi noor liya karte hain.Apne Maula ki hai bas shaan-e-azeem, jaanwar bhi karein jinki ta’zeem,
Sang karte hain adab se tasleem, ped sajde mein gira karte hain.Ungliyan paayin woh pyaari pyaari, jinse dariya-e-karam hain jaari,
Josh par aati hai jab gham-khwaari, tashne sairaab hua karte hain.Apne dil ka hai unhin se aaram, saunpe hain apne unhin ko sab kaam,
Lau lagi hai ki ab is dar ke ghulam, chaara-e-dard-e-Raza karte hain.
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
વસ્ફ-એ-રુખ ઉનકા કિયા કરતે હૈં, શરહ-એ-વશ્શમ્સો દુહા કરતે હૈં,
ઉનકી હમ મદ્હ-ઓ-સના કરતે હૈં, જિનકો મહમૂદ કહા કરતે હૈં.તૂ હૈ ખુર્શીદ-એ-રિસાલત પ્યારે, છુપ ગયે તેરી ઝિયા મેં તારે,
અંબિયા ઔર હૈં સબ મહ પારે, તુજસે હી નૂર લિયા કરતે હૈં.અપને મૌલા કી હૈ બસ શાન-એ-અઝીમ, જાનવર ભી કરેં જિનકી તા’ઝીમ,
સંગ કરતે હૈં અદબ સે તસ્લીમ, પેડ સજદે મેં ગિરા કરતે હૈં.ઉંગલિયાં પાઈં વો પ્યારી પ્યારી, જિનસે દરિયા-એ-કરમ હૈં જારી,
જોશ પર આતી હૈ જબ ગમ-ખ્વારી, તશ્ને સૈરાબ હુઆ કરતે હૈં.અપને દિલ કા હૈ ઉન્હીં સે આરામ, સૌંપે હૈં અપને ઉન્હીં કો સબ કામ,
લૌ લગી હૈ કિ અબ ઇસ દર કે ગુલામ, ચારા-એ-દર્દ-એ-રઝા કરતે હૈં.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस नात का शायर कौन है?
इस शाहकार नात के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. “शरह-ए-वश्शम्सो दुहा” का क्या मतलब है?
इसका मतलब है “सूरह वश्शम्स और सूरह वद्दुहा की तशरीह (व्याख्या)”। आला हज़रत फ़रमा रहे हैं कि जो लोग हुज़ूर (स.अ.व.) के चेहरा-ए-अनवर की तारीफ़ करते हैं, वो गोया इन दोनों सूरतों की तफ़्सीर बयान करते हैं, क्योंकि इन सूरतों में अल्लाह ने सूरज और दिन की रौशनी की क़सम खाकर अपने महबूब की शान बयान की है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह नात सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।