Ye nazar hijab nahi rahe, ye bade naseeb ki baat hai

“Ye nazar hijab nahi rahe, ye bade naseeb ki baat hai” (यह नज़र हिजाब नहीं रहे, ये बड़े नसीब की बात है) एक प्रसिद्ध पंक्ति है जो अक्सर सूफी या प्रेम-भक्ति गीतों (Naat/Qawwali) में आती है, जो ईश्वर या प्रियजन की भक्ति में लीन होकर अपनी नज़र के शुद्ध होने और उसे केवल उन्हीं में देखने की गहरी भावना व्यक्त करती है, यह दर्शाता है कि यह एक सौभाग्य की बात है कि आँखें सांसारिक मोह से मुक्त होकर केवल सच्चाई को देख पाती हैं; इसके पूर्ण बोल किसी विशेष गीत से जुड़े हो सकते हैं जो किसी गायक (जैसे Aslam Sabri) या सूफी कवि द्वारा गाया गया हो, और यह पंक्ति ‘अस्लम साबरी’ की ‘तू किसी और की जागीर है’ जैसी गजलों में या इसी तरह के भक्ति गीतों में मिलती है, जहां यह ईश्वर के प्रेम में डूबने का भाव दर्शाती है.
इस पंक्ति का अर्थ:
“ये नज़र हिजाब नहीं रहे” (Yeh nazar hijab nahi rahe): मेरी आँखें अब परदे या रोक (हिजाब) नहीं रहीं; वे अब सांसारिक चीज़ों या दूसरों को नहीं देखतीं, बल्कि केवल एक ही सत्य (ईश्वर/प्रियतम) पर केंद्रित हैं.
“ये बड़े नसीब की बात है” (Yeh bade naseeb ki baat hai): यह बहुत बड़ा सौभाग्य है कि मेरी दृष्टि इतनी पवित्र और केंद्रित हो गई है.
संभावित संदर्भ:
यह पंक्ति अक्सर किसी ग़ज़ल या कव्वाली का हिस्सा होती है, जहाँ भक्त ईश्वर के प्रेम में इतना डूब जाता है कि उसकी दृष्टि में केवल वही समाया होता है. यह भक्ति की पराकाष्ठा और आध्यात्मिक उन्नति को दर्शाती है.
पूर्ण बोल ढूंढने के लिए:
आप इस पंक्ति को खोज इंजन (जैसे Google) में ‘Aslam Sabri lyrics’ या ‘Naat lyrics’ के साथ जोड़कर देख सकते हैं, क्योंकि यह अक्सर इसी तरह के भक्ति गीतों का हिस्सा होती है.

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