ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात | तेरे सदक़े जान-ए-जानाँ / Aye Wajh-e-Takhleeq-e-Kainat | Tere Sadqe Jaan-e-Jaanan
“ज़मीन-ओ-ज़माँ तुम्हारे लिए, मकीन-ओ-मकाँ तुम्हारे लिए” यह सिर्फ़ एक नात का मिसरा नहीं, बल्कि अक़ीदा-ए-अहल-ए-सुन्नत की वो बुनियाद है कि यह कायनात और इसमें जो कुछ भी है, सब हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के सदक़े में बनाया गया है। इस शाहकार कलाम को इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी क़लम से सजाया है।
यह नात-ए-पाक आला हज़रत के मशहूर दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” में शामिल है और इसे अक्सर “ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात” के उनवान से भी पढ़ा जाता है। इस पेज पर आपको इस अक़ीदा-अफ़रोज़ नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | ज़मीन-ओ-ज़माँ तुम्हारे लिए (ऐ वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-काइनात) |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
| मशहूर नात-ख़्वाँ | ओवैस रज़ा क़ादरी, सय्यिद हस्सानुल्लाह हुसैनी |
“Zameen o Zaman Tumhare Liye” Full Naat Lyrics
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
ज़मीन-ओ-ज़माँ तुम्हारे लिए, मकीन-ओ-मकाँ तुम्हारे लिए,
चुनीन-ओ-चुनाँ तुम्हारे लिए, बने दो जहाँ तुम्हारे लिए।दहन में ज़बाँ तुम्हारे लिए, बदन में है जाँ तुम्हारे लिए,
हम आए यहाँ तुम्हारे लिए, उठे भी वहाँ तुम्हारे लिए।तुम्हारी चमक, तुम्हारी दमक, तुम्हारी झलक, तुम्हारी महक,
ज़मीन-ओ-फ़लक, सिमाक-ओ-समक में सिक्का निशाँ तुम्हारे लिए।इशारे से चाँद चीर दिया, छुपे हुए ख़ुर को फेर लिया,
गए हुए दिन को ‘अस्र किया, ये ताब-ओ-तवाँ तुम्हारे लिए।सबा वो चले कि बाग़ फले, वो फूल खिले कि दिन हों भले,
लिवा के तले सना में खुले, रज़ा की ज़बाँ तुम्हारे लिए।
Roman English Lyrics
Zameen-o-zaman tumhare liye, makeen-o-makaan tumhare liye,
Chuneen-o-chunaan tumhare liye, bane do jahan tumhare liye.Dahan mein zabaan tumhare liye, badan mein hai jaan tumhare liye,
Hum aaye yahan tumhare liye, uthe bhi wahan tumhare liye.Tumhari chamak, tumhari damak, tumhari jhalak, tumhari mehak,
Zameen-o-falak, simaak-o-samak mein sikka nishaan tumhare liye.Ishaare se chaand cheer diya, chhupe hue khur ko pher liya,
Gaye hue din ko ‘Asr kiya, yeh taab-o-tawaan tumhare liye.Saba woh chale ki baagh phale, woh phool khile ki din hon bhale,
Liwa ke tale sana mein khule, Raza ki zabaan tumhare liye.
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
زمین و زماں تمہارے لئے، مکین و مکاں تمہارے لئے
چنین و چناں تمہارے لئے، بنے دو جہاں تمہارے لئےدہن میں زباں تمہارے لئے، بدن میں ہے جاں تمہارے لئے
ہم آئے یہاں تمہارے لئے، اٹھیں بھی وہاں تمہارے لئےتمہاری چمک، تمہاری دمک، تمہاری جھلک، تمہاری مہک
زمین و فلک، سماک و سمک میں سکّہ نشاں تمہارے لئےاشارے سے چاند چیر دیا، چھپے ہوئے خور کو پھیر لیا
گئے ہوئے دن کو عصر کیا، یہ تاب و تواں تمہارے لئےصبا وہ چلے کہ باغ پھلے، وہ پھول کھلے کہ دن ہوں بھلے
لوا کے تلے ثنا میں کھلے، رضاؔ کی زباں تمہارے لئے
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
ઝમીન-ઓ-ઝમાઁ તુમ્હારે લિએ, મકીન-ઓ-મકાઁ તુમ્હારે લિએ,
ચુનીન-ઓ-ચુનાઁ તુમ્હારે લિએ, બને દો જહાં તુમ્હારે લિએ.દહન મેં ઝબાઁ તુમ્હારે લિએ, બદન મેં હૈ જાઁ તુમ્હારે લિએ,
હમ આએ યહાં તુમ્હારે લિએ, ઉઠે ભી વહાં તુમ્હારે લિએ.તુમ્હારી ચમક, તુમ્હારી દમક, તુમ્હારી ઝલક, તુમ્હારી મહક,
ઝમીન-ઓ-ફલક, સિમાક-ઓ-સમક મેં સિક્કા નિશાઁ તુમ્હારે લિએ.ઇશારે સે ચાંદ ચીર દિયા, છુપે હુએ ખુર કો ફેર લિયા,
ગએ હુએ દિન કો ‘અસ્ર’ કિયા, યહ તાબ-ઓ-તવાઁ તુમ્હારે લિએ.સબા વો ચલે કિ બાગ ફલે, વો ફૂલ ખિલે કિ દિન હોં ભલે,
લિવા કે તલે સના મેં ખુલે, રઝા કી ઝબાઁ તુમ્હારે લિએ.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस नात का शायर कौन है?
इस शाहकार नात के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. “वज्ह-ए-तख़्लीक़-ए-कायनात” का क्या मतलब है?
इसका मतलब है “कायनात (ब्रह्मांड) के बनने की वजह”। यह अहले सुन्नत का अक़ीदा है, जो हदीस-ए-क़ुदसी “लौलाका लमा ख़लक़तुल अफ़लाक” (अगर आप न होते तो मैं कायनात को पैदा न करता) पर आधारित है, कि अल्लाह ने यह पूरी कायनात अपने महबूब हज़रत मुहम्मद (स.अ.व.) के लिए बनाई है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह नात सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।