ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों के
ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों के ताजे-सर बनते हैं सय्यारों के हम से चोरों पे जो फ़रमाएं करम ख़िल्अ़ते-ज़र बनें …
ज़र्रे झड़ कर तेरी पैज़ारों के ताजे-सर बनते हैं सय्यारों के हम से चोरों पे जो फ़रमाएं करम ख़िल्अ़ते-ज़र बनें …