आख़िरी रोज़े हैं दिल ग़मनाक मुज़्तर जान है
आख़िरी रोज़े हैं दिल ग़मनाक मुज़्तर जान हैहसरता वा-हसरता अब चल दिया रमज़ान है ‘आशिक़ान-ए-माह-ए-रमज़ाँ रो रहे हैं फूट करदिल …
आख़िरी रोज़े हैं दिल ग़मनाक मुज़्तर जान हैहसरता वा-हसरता अब चल दिया रमज़ान है ‘आशिक़ान-ए-माह-ए-रमज़ाँ रो रहे हैं फूट करदिल …