Surah Fatiha in Hindi – सूरह फातिहा हिंदी में (तर्जुमा, तफसीर, फायदे)

Surah Fatiha in Hindi – सूरह फातिहा हिंदी में (तर्जुमा, तफसीर, फायदे)

बिस्मिल्लाह-हिर्रहमान-निर्रही

Table of Contents
शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है।

Surah Fatiha in Hindi – सूरह फातिहा हिंदी में (तर्जुमा, तफसीर, फायदे)
Surah Fatiha in Hindi | सूरह फातिहा हिंदी में | तर्जुमा, तफसीर, फायदे और रहस्य | जानिए क्यों इसे उम्मुल किताब कहा जाता है? इसे पढ़ने के चमत्कारी फायदे और हदीस में इसकी फजीलत

Surah Fatiha In Hindi
Surah Fatiha In Arabic : सूरह फातिहा अरबी में
बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम

अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन

अर रहमा निर रहीम

मालिकि यौमिद्दीन

इय्याक न अबुटु व इय्याका नस्तईन

इहदिनस् सिरातल मुस्तक़ीम

सिरातल लज़ीना अन अमता अलय हिम

गैरिल मग़दूबी अलय हिम् वलद दालीन

Surah Fatiha In English : सूरह फातिहा इंग्लिश में
Bismilla Hirrahma Nir Raheem

Alhamdulillahi Rabbil Aalameen

Arrahmanir Raheem

Maliki Yaumiddeen

Iyyaka Nabudu Waiyyakanastain

Ihdinassiratal Mustaqeem

Siratallazina Anamta Alaihim

Ghairil Maghdubi Alaihim Waladdalleen

Surah Fatiha Ka Tarjuma : सूरह फातिहा का तर्जुमा
“शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है सब तारीफ अल्लाह ही के लिए साजावार है और सारे जहान का पालने वाला बड़ा मेहरबान रहम वाला है रोजे जजा का मालिक है या अल्लाह हम तेरी ही इबादत करते है और तुझ ही से मदद चाहते है तू हमको सिदी राह पर साबित कदम रख उनकी रह जिन पे तूने अपनी नेहमत आता की है ना उनकी राह जिन पर तेरा गजब ढाया गया और ना गुमराह की”

Surah Fatiha In Hindi
Surah Fatiha In Hindi
उम्मुल किताब (किताब की माँ) क्यों कहा जाता है?
✅ सूरह फातिहा को “उम्मुल किताब” कहा जाता है क्योंकि यह पूरे क़ुरआन का निचोड़ है।

👉 इस्लाम में यह सबसे महत्वपूर्ण सूरह है और हर नमाज़ में इसे पढ़ना अनिवार्य है।

👉 यह वह सूरह है, जिसे अल्लाह तआला ने सीधे अपने नबी ﷺ को सिखाया।

सूरह फातिहा कब नाजिल हुई (Surah Fatiha Kab Nazil Hui)
सूरह फातिहा मक्का में नाजिल हुई थी और इसमें 7 आयतें हैं।

नोट: कुछ उलेमा का कहना है कि सूरह फातिहा मक्का में नाजिल होने के बाद, इसके कुछ हिस्से मदीना में भी नाजिल हुए थे।

Surah Fatiha Ki Fazilat : सूरह फातिहा की फजीलत
1. सूरह फातिहा – आसमान से मिला एक अनोखा नूर
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं:

“एक दिन जिब्रील अलैहिस्सलाम, नबी ﷺ के पास बैठे हुए थे कि अचानक उन्होंने एक जोरदार आवाज़ सुनी। जब उन्होंने सिर उठाया तो कहा: ‘यह आसमान का एक दरवाज़ा है, जो आज पहली बार खुला है और इससे पहले कभी नहीं खुला।’ फिर उस दरवाजे से एक फ़रिश्ता उतरा। तब जिब्रील अलैहिस्सलाम ने कहा: ‘यह फ़रिश्ता जो ज़मीन पर उतरा है, यह पहले कभी नहीं उतरा।’

फिर उस फ़रिश्ते ने कहा:

‘खुशख़बरी हो आपको दो नूरों की, जो आपको इनायत किए गए हैं और ये आपसे पहले किसी नबी को नहीं मिले।

एक सूरह फातिहा

दूसरी सूरह बकरा की आखिरी दो आयतें

इनमें से जो भी हरफ़ (अक्षर) तुम पढ़ोगे, उसकी माँगी हुई चीज़ तुम्हें ज़रूर मिलेगी।”

(सही मुस्लिम – 1877)

✅ फायदे
(A) सूरह फातिहा और सूरह बकरा की आखिरी दो आयतें किसी नबी को नहीं दी गईं, यह सिर्फ नबी ﷺ को दी गई एक विशेष नेमत (नूर) है।

(B) यह जन्नत के दरवाजे से उतरी हैं और इनमें जब भी कोई दुआ की जाए, वह कबूल होती है।

(C) जो इन्हें पढ़ता है, उसकी दुआ जल्द कबूल होती है और उसे अल्लाह की रहमत हासिल होती है।

2. सूरह फातिहा – सबसे अफज़ल और असरदार दुआ
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“सूरह फातिहा सबसे अफज़ल दुआ है।”

(जामिउ’त-तिरमिज़ी 3383)

✅ फायदे
(A) सूरह फातिहा इस्लाम की सबसे बेहतरीन और असरदार दुआ है।

(B) जितनी भी दुआएं हम नमाज़ में, सोते, उठते या आम जिंदगी में पढ़ते हैं, उन सब से अफज़ल दुआ सूरह फातिहा है।

(C) यह दुआ इंसान के हर तकलीफ, परेशानी और मुश्किल का हल है।

Also Read : Surah Falaq Surah Nas: Benefits, Tafseer & Importance in Islam (हिंदी में पूरी जानकारी)

3. यह अल्लाह से सीधा रिश्ता जोड़ती है
जब हम सूरह फातिहा पढ़ते हैं, तो यह सीधा अल्लाह से बातचीत करने जैसा होता है। यह एक दुआ है जिसे खुद अल्लाह ने हमें सिखाया है। हदीस में आता है कि जब कोई बंदा इसे पढ़ता है, तो अल्लाह तआला हर आयत का जवाब देते हैं:

हदीस:

“जब बंदा कहता है: ‘अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन’, तो अल्लाह फरमाते हैं: ‘मेरे बंदे ने मेरी तारीफ की।’”

(सहीह मुस्लिम 395)

4. हदीस में सूरह फातिहा की फजीलत
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“जो शख्स सूरह फातिहा पढ़ता है, उसे पूरे कुरआन जितना सवाब मिलता है।”

(मुस्नद अहमद 25083)

5. हर बीमारी का इलाज (Spiritual Cure)
रसूलुल्लाह ﷺ ने सूरह फातिहा को शिफ़ा (इलाज) बताया है।

सूरह फातिहा को “रुक़्या” (इलाज की सूरह) कहा जाता है।

इसे पानी पर पढ़कर पीने से शारीरिक और मानसिक बीमारियों से राहत मिलती है।

अबू-सईद ख़ुदरी रजी अल्लाहु अन्हू से रिवायत की कुछ सहाबा किराम सफ़र में थे अरब के क़बीलों में से किसी क़बीले के सामने से उन का गुज़र हुआ। उन्होंने उन कबीले के लोगों से चाहा कि वो उन्हें अपना मेहमान बनाएँ। मगर उन्होंने मेहमान बनाने से इनकार कर दिया, फिर उन्होंने कहा : क्या तुम में कोई दम करने वाला है। क्योंकि क़ौम के सरदार को किसी चीज़ जानवर ने डस लिया है। या फिर उसे कोई बीमारी हो गई है। तो एक सहाबा किराम ने कहा : हाँ फिर वो उसके क़रीब आए और उसे सूरा फ़ातिहा से दम कर दिया। वो आदमी ठीक हो गया तो उस ( दम करने वाले) को बकरियों का एक रेवड़ (तीस बकरियाँ) पेश की गईं। उसने उन्हें (फ़ौरी तौर पर) क़बूल करने (काम में लाने) से इनकार कर दिया और कहा : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह माजरा सुना दूँ। वो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ख़िदमत में हाज़िर हुआ और सारा माजरा आप को सुनाया और कहा मैंने सूरा फ़ातिहा के अलावा और कोई दम नहीं किया। आप मुस्कुराए और फ़रमाया : तुम्हें कैसे पता चला कि वो दम (भी) है? फिर उन्हें ले-लो और अपने साथ मेरा भी हिस्सा रखो।

(सही बुखारी – 5749)

फायदे – मालूम हुआ की जब कोई बीमारी या कोई जानवर काट ले तो सुरह फातिहा से दम कर सकते है

Surah Fatiha Ke Bagair Namaz Nahi : सुरह फातिहा के बगैर नमाज नही
हदीस – नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया, की जिस ने सूरह फातिहा ना पढ़ी उसकी नमाज़ नहीं हुई ऐसा 3 बार फरमाया फिर अबू हुरैरा रजी अल्लाहु आन्हु से कहा गया की जब हम इमाम के पीछे हो तो उसे अपने जी में पद lo

(सही मुस्लिम – 395,878)

नोट – सूरह फातिहा को नमाज मे पढ़ना जरूरी है क्युकी बिना सूरह फातिहा के नमाज नहीं होती। इसीलिए हर मुसलमान को चाहिए की सूरह फातिहा को याद रखे।

Conclusion

Surah Fatiha in Hindi – सूरह फातिहा इस्लाम की सबसे अहम सूरह है। यह सिर्फ नमाज़ की जरूरी सूरह ही नहीं, बल्कि जिंदगी के हर मसले का हल भी है। इसे पढ़ने और अमल करने से दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मिलती है।

👉 क्या आप रोज़ाना सूरह फातिहा पढ़ते हैं?

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