Nazar Ek Chaman Se Do Char Hai Lyrics (4 Languages) | Aala Hazrat
“नज़र इक चमन से दो चार है, न चमन चमन भी निसार है” यह एक ऐसा नातिया कलाम है जो हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के हुस्न-ओ-जमाल और आपकी ज़ात-ए-मुबारक को कायनात की हर ख़ूबसूरती की असल क़रार देता है। इस शाहकार नात को इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी क़लम से सजाया है। यह नात-ए-पाक उनके मशहूर दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” में शामिल है।
इस नात में आला हज़रत फ़रमाते हैं कि दुनिया के सारे चमन, सारे बाग़ और सारी बहारें हुज़ूर (स.अ.व.) के एक जल्वे पर क़ुर्बान हैं। कायनात की हर चमक-दमक और ख़ूबसूरती उन्हीं के दम से है। इस पेज पर आपको इस रूहानी नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | नज़र इक चमन से दो चार है |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
“Nazar Ek Chaman Se Do Char Hai” Full Naat Lyrics
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
نظر اک چمن سے دو چار ہے نہ چمن چمن بھی نثار ہے
عجب اس کے گل کی بہار ہے کہ بہار بلبلِ زار ہےیہ سمن، یہ سوسن و یاسمن، یہ بنفشہ سنبل و نسترن
گل و سرو و لالہ بھرا چمن، وہی ایک جلوہ ہزار ہےوہ نہ تھا تو باغ میں کچھ نہ تھا، وہ نہ ہو تو باغ ہو سب فنا
وہ ہے جان، جان سے ہے بقا، وہی بن ہے بن سے بار ہےبا ادب جھکا لو سرِ ولا کہ میں نام لوں گل و باغ کا
گلِ تر محمدِ مصطفیٰ چمن ان کا پاک دیار ہےوہ رضاؔ کے نیزے کی مار ہے کہ عدو کے سینے میں غار ہے
کسے چارہ جوئی کا وار ہے کہ یہ وار وار سے پار ہے
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
नज़र इक चमन से दो चार है, न चमन चमन भी निसार है,
अजब उसके गुल की बहार है, कि बहार बुलबुल-ए-ज़ार है।यह समन, यह सोसन-ओ-यास्मन, यह बनफ़्शा सुम्बुल-ओ-नस्तरन,
गुल-ओ-सर्व-ओ-लाला भरा चमन, वोही एक जल्वा हज़ार है।वोह न था तो बाग़ में कुछ न था, वोह न हो तो बाग़ हो सब फ़ना,
वोह है जान, जान से है बक़ा, वोही बुन है बुन से बार है।ब-अदब झुका लो सर-ए-विला कि मैं नाम लूँ गुल-ओ-बाग़ का,
गुल-ए-तर मुहम्मद-ए-मुस्तफ़ा, चमन उनका पाक दियार है।वोह रज़ा के नेज़े की मार है कि अदू के सीने में ग़ार है,
किसे चारा जूई का वार है कि यह वार, वार से पार है।
Roman English Lyrics
Nazar ik chaman se do chaar hai, na chaman chaman bhi nisaar hai,
Ajab uske gul ki bahaar hai, ki bahaar bulbul-e-zaar hai.Yeh saman, yeh so-san-o-yasman, yeh banafsha sumbul-o-nastaran,
Gul-o-sarw-o-laalah bhara chaman, wohi ek jalwa hazaar hai.Woh na tha toh baagh mein kuch na tha, woh na ho toh baagh ho sab fana,
Woh hai jaan, jaan se hai baqa, wohi bun hai bun se baar hai.Ba-adab jhuka lo sar-e-wila ki main naam loon gul-o-baagh ka,
Gul-e-tar Muhammad-e-Mustafa, chaman unka paak diyaar hai.Woh Raza ke neze ki maar hai ki adu ke seene mein ghaar hai,
Kise chaara jooi ka waar hai ki yeh waar, waar se paar hai.
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
નઝર ઇક ચમન સે દો ચાર હૈ, ન ચમન ચમન ભી નિસાર હૈ,
અજબ ઉસકે ગુલ કી બહાર હૈ, કિ બહાર બુલબુલ-એ-ઝાર હૈ.યહ સમન, યહ સો-સન-ઓ-યાસ્મન, યહ બનફ્શા સુમ્બુલ-ઓ-નસ્તરન,
ગુલ-ઓ-સર્વ-ઓ-લાલા ભરા ચમન, વોહી એક જલવા હજાર હૈ.વોહ ન થા તો બાગ મેં કુછ ન થા, વોહ ન હો તો બાગ હો સબ ફના,
વોહ હૈ જાન, જાન સે હૈ બકા, વોહી બુન હૈ બુન સે બાર હૈ.બ-અદબ ઝુકા લો સર-એ-વિલા કિ મૈં નામ લૂં ગુલ-ઓ-બાગ કા,
ગુલ-એ-તર મુહમ્મદ-એ-મુસ્તફા, ચમન ઉનકા પાક દિયાર હૈ.વોહ રઝા કે નેઝે કી માર હૈ કિ અદૂ કે સીને મેં ગાર હૈ,
કિસે ચારા જૂઈ કા વાર હૈ કિ યહ વાર, વાર સે પાર હૈ.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस नात का शायर कौन है?
इस शाहकार नात के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. इस नात का मुख्य विषय क्या है?
इस नात का मुख्य विषय हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ज़ात को कायनात की हर ख़ूबसूरती, हर बहार और हर रौनक़ की असल वजह क़रार देना है। आला हज़रत फ़रमाते हैं कि दुनिया के तमाम फूल, बाग़ और चमन, सब हुज़ूर (स.अ.व.) के ही एक जल्वे का हिस्सा हैं और उन्हीं के दम से क़ायम हैं।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह नात सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।