Ali Ke Naam Ka Charcha Lyrics (4 Languages) | Hasnain Akbar

Ali Ke Naam Ka Charcha Nahi Qabool Lyrics (4 Languages)

“जिस को अली के नाम का चर्चा नहीं क़बूल, काबे को ऐसे शख़्स का सजदा नहीं क़बूल”, यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि अक़ीदत की वो मेराज है जहाँ ज़ाहिरी इबादत पर मोहब्बत-ए-अली को तरजीह दी गई है। यह दिलकश मनक़बत अमीर-उल-मोमिनीन, हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (कर्रमल्लाहु वजहुल करीम) की बारगाह में एक शानदार नज़राना-ए-अक़ीदत है।

इस कलाम को शायर हसनैन अकबर ने लिखा है और मशहूर मनक़बत ख़्वाँ मुख़्तार हुसैन फतेहपुरी ने इसे अपनी ख़ूबसूरत आवाज़ में पढ़कर हर आशिक़-ए-अली के दिल तक पहुँचाया है। इस पेज पर आपको इस मुबारक मनक़बत के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।

मनक़बत की जानकारी (Manqabat Information Table)

 

फीचर (Feature)विवरण (Details)
कलाम का उनवानअली के नाम का चर्चा
शायर (Poet)हसनैन अकबर (Hasnain Akbar)
मनक़बत ख़्वाँ (Reciter)मुख़्तार हुसैन फतेहपुरी (Mukhtar Hussain Fatehpuri)
कम्पोजीशन (Composition)अकबर अब्बास (Akbar Abbas)

“Ali Ke Naam Ka Charcha” Full Manqabat Lyrics

Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)

जिस को अली के नाम का चर्चा नहीं क़बूल,
काबे को ऐसे शख़्स का सजदा नहीं क़बूल।

घर से चलीं तो काबे में जा कर रुकेंगी अब,
बिन्त-ए-असद को राह में रुकना नहीं क़बूल।

पहला है और पहले ही नंबर पे है अली,
दम दम क़लंदरों को भी चौथा नहीं क़बूल।

ख़ैबर में मुर्तज़ा को अलम दे के मुस्तफ़ा,
बोले कि कोई भागने वाला नहीं क़बूल।

राह-ए-नजफ़ से हट के कहाँ जाए ये फ़क़ीर,
‘अकबर’ को कोई दूसरा रस्ता नहीं क़बूल।

Roman English Lyrics

Jis ko Ali ke naam ka charcha nahi qabool,
Kaabe ko aise shakhs ka sajda nahi qabool.

Ghar se chalein to Kaabe mein jaa kar rukengi ab,
Bint-e-Asad ko raah mein rukna nahi qabool.

Pehla hai aur pehle hi number pe hai Ali,
Dam Dam Qalandaron ko bhi chautha nahi qabool.

Khaybar mein Murtaza ko alam de ke Mustafa,
Bole keh koi bhaagne wala nahi qabool.

Raah-e-Najaf se hat ke kahan jaaye yeh faqeer,
‘Akbar’ ko koi doosra rasta nahi qabool.

Urdu Lyrics (اردو کے بول)

جس کو علیؑ کے نام کا چرچا نہیں قبول
کعبے کو ایسے شخص کا سجدہ نہیں قبول

گھر سے چلیں تو کعبے میں جا کر رکیں گی اب
بنتِ اسدؑ کو راہ میں رُکنا نہیں قبول

پہلا ہے اور پہلے ہی نمبر پہ ہے علیؑ
دم دم قلندروں کو بھی چوتھا نہیں قبول

خیبر میں مرتضیٰ کو علم دے کے مصطفیٰؐ
بولے کہ کوئی بھاگنے والا نہیں قبول

راہِ نجف سے ہٹ کے کہاں جائے یہ فقیر
اکبرؔ کو کوئی دوسرا رستہ نہیں قبول

Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)

જિસ કો અલી કે નામ કા ચર્ચા નહીં કબૂલ,
કાબે કો ઐસે શખ્સ કા સજદા નહીં કબૂલ.

ઘર સે ચલીં તો કાબે મેં જા કર રુકેંગી અબ,
બિન્ત-એ-અસદ કો રાહ મેં રુકના નહીં કબૂલ.

પહલા હૈ ઔર પહલે હી નંબર પે હૈ અલી,
દમ દમ કલંદરોં કો ભી ચૌથા નહીં કબૂલ.

ખૈબર મેં મુર્તઝા કો અલમ દે કે મુસ્તફા,
બોલે કિ કોઈ ભાગને વાલા નહીં કબૂલ.

રાહ-એ-નજફ સે હટ કે કહાં જાએ યે ફકીર,
‘અકબર’ કો કોઈ દૂસરા રસ્તા નહીં કબૂલ.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

Q1. इस मनक़बत का शायर कौन है?

इस मनक़बत के शायर हसनैन अकबर हैं, जैसा कि उन्होंने आख़िरी शेर में अपना तख़ल्लुस “अकबर” इस्तेमाल किया है।

Q2. इस कलाम का मुख्य संदेश क्या है?

इस कलाम का मुख्य संदेश यह है कि हज़रत अली (कर्रमल्लाहु वजहुल करीम) से सच्ची मोहब्बत और अक़ीदत रखना ईमान का एक लाज़मी हिस्सा है। शायर के नज़दीक, जिस दिल में अली का ज़िक्र और चर्चा नहीं, उसकी इबादतें भी बेमानी हैं। यह कलाम हज़रत अली की विलादत-ए-बा-सआदत, आपकी बहादुरी और आपके बेमिसाल मक़ाम को भी बयान करता है।

ज़रूरी लिंक्स (Important Links)

  • YouTube पर सुनें: मुख़्तार हुसैन फतेहपुरी की आवाज़ में यह मनक़बत सुनें।
  • शायर के बारे में जानें: शायर हसनैन अकबर के बारे में और पढ़ें।
  • हमारी वेबसाइट पर हज़रत अली की शान में दूसरी मनक़बतें पढ़ें।

 

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