Ya Rasoolallah Tere Dar Ki Fazaon Ko Salam Lyrics (4 Languages)
“या रसूलल्लाह! तेरे दर की फ़ज़ाओं को सलाम, गुंबद-ए-ख़ज़रा की ठंडी ठंडी छाओं को सलाम”, यह सिर्फ़ एक सलाम नहीं, बल्कि हर आशिक़-ए-रसूल के दिल की वो सदा है जो मदीना-ए-मुनव्वरा की हर चीज़ पर अपनी जान छिड़कता है। इस शाहकार कलाम को शायर-ए-हफ़्त ज़बाँ, मुहम्मद अली ज़हूरी क़सूरी (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखा है।
इस सलाम में शायर ने न सिर्फ़ हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बारगाह में सलाम पेश किया है, बल्कि मदीना की गलियों, वहाँ के फ़क़ीरों, रौज़े का तवाफ़ करती हवाओं, और वहाँ उठने वाली हर दुआ को भी सलाम का नज़राना पेश किया है। इस पेज पर आपको इस रूहानी सलाम के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।

सलाम की जानकारी (Salam Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | या रसूलल्लाह! तेरे दर की फ़ज़ाओं को सलाम |
| शायर (Poet) | मुहम्मद अली ज़हूरी क़सूरी (Muhammad Ali Zahoori) |
| मशहूर नात-ख़्वाँ | सिद्दीक़ इस्माइल, ओवैस रज़ा क़ादरी, सरवर हुसैन नक़्शबंदी |
| कलाम की क़िस्म | सलाम / नात-ए-पाक |
“Ya Rasoolallah Tere Dar Ki Fazaon Ko Salam” Full Lyrics
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
या रसूलल्लाह! तेरे दर की फ़ज़ाओं को सलाम,
गुंबद-ए-ख़ज़रा की ठंडी ठंडी छाओं को सलाम।मस्जिद-ए-नबवी के सुब्हों और शामों को सलाम,
या नबी! तेरे ग़ुलामों के ग़ुलामों को सलाम।वालिहाना जो तवाफ़-ए-रौज़ा-ए-अक़्दस करें,
मस्त-ओ-बेख़ुद वज्द करती उन हवाओं को सलाम।जो मदीने के गली कूचों में देते हैं सदा,
उन फ़क़ीरों, राह-गीरों और गदाओं को सलाम।ऐ ज़हूरी! ख़ुश-नसीबी ले गई जिन को हिजाज़,
उन के अश्कों और उन की इल्तिजाओं को सलाम।
Roman English Lyrics
Ya Rasoolallah! tere dar ki fazaon ko salaam,
Gumbad-e-Khazra ki thandi thandi chhaon ko salaam.Masjid-e-Nabawi ke subhon aur shaamon ko salaam,
Ya Nabi! tere ghulamon ke ghulamon ko salaam.Waalihana jo tawaaf-e-rauza-e-aqdas karein,
Mast-o-bekhud wajd karti un hawaon ko salaam.Jo Madine ke gali koochon mein dete hain sada,
Un faqeeron, raah-geeron aur gadaon ko salaam.Aye Zahoori! khush-naseebi le gayi jin ko Hijaaz,
Un ke ashkon aur un ki iltijaaon ko salaam.
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
یا رسول اللہ! تیرے در کی فضاؤں کو سلام
گنبدِ خضریٰ کی ٹھنڈی ٹھنڈی چھاؤں کو سلاممسجدِ نبوی کے صبحوں اور شاموں کو سلام
یا نبی! تیرے غلاموں کے غلاموں کو سلاموالہانہ جو طوافِ روضۂ اقدس کریں
مست و بے خود وجد کرتی ان ہواؤں کو سلامجو مدینے کی گلی کوچوں میں دیتے ہیں صدا
ان فقیروں، راہ گیروں اور گداؤں کو سلاماے ظہوریؔ! خوش نصیبی لے گئی جن کو حجاز
ان کے اشکوں اور ان کی التجاؤں کو سلام
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
યા રસૂલલ્લાહ! તેરે દર કી ફઝાઓં કો સલામ,
ગુંબદ-એ-ખઝરા કી ઠંડી ઠંડી છાઓં કો સલામ.મસ્જિદ-એ-નબવી કે સુબ્હોં ઔર શામોં કો સલામ,
યા નબી! તેરે ગુલામોં કે ગુલામોં કો સલામ.વાલિહાના જો તવાફ-એ-રૌઝા-એ-અકદસ કરેં,
મસ્ત-ઓ-બેખુદ વજ્દ કરતી ઉન હવાઓં કો સલામ.જો મદીને કે ગલી કૂચોં મેં દેતે હૈં સદા,
ઉન ફકીરોં, રાહ-ગીરોં ઔર ગદાઓં કો સલામ.ઐ ઝહૂરી! ખુશ-નસીબી લે ગઈ જિન કો હિજાઝ,
ઉન કે અશ્કોં ઔર ઉન કી ઇલ્તિજાઓં કો સલામ.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस सलाम का शायर कौन है?
इस शाहकार सलाम के शायर मुहम्मद अली ज़हूरी क़सूरी हैं। उन्होंने आख़िरी अशआर में अपना तख़ल्लुस “ज़हूरी” इस्तेमाल किया है।
Q2. इस कलाम का मुख्य विषय क्या है?
इस कलाम का मुख्य विषय हुज़ूर नबी-ए-करीम (स.अ.व.) और मदीना-ए-मुनव्वरा से जुड़ी हर चीज़ के लिए अपनी बेपनाह मोहब्बत और अक़ीदत का इज़हार करना है। यह एक आशिक़ की उस कैफ़ियत को दर्शाता है जहाँ महबूब से निस्बत रखने वाली हर शै महबूब हो जाती है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें (Owais Qadri): ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह सलाम सुनें।
- YouTube पर सुनें (Siddiq Ismail): सिद्दीक़ इस्माइल की आवाज़ में यह क्लासिक सलाम सुनें।
- शायर के बारे में जानें: मुहम्मद अली ज़हूरी के बारे में और पढ़ें।