Allah Allah Allahu Ma Li Rabbun Illa Hu Lyrics (Qasida by Akhtar Raza Khan)
“अल्लाह अल्लाह अल्लाहु, मा ली रब्बुन इल्ला हू” एक ऐसा रूहानी क़सीदा है जो अल्लाह की हम्द और उसके प्यारे महबूब, हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की मद्ह (प्रशंसा) का एक शाहकार नमूना है। इस मुबारक कलाम को चौदहवीं सदी के अज़ीम आलिम और शायर, हुज़ूर ताजुश्शरिया अल्लामा अख़्तर रज़ा ख़ान ‘अज़हरी’ (रहमतुल्लाह अलैह) ने लिखा है।
यह क़सीदा तौहीद के इक़रार से शुरू होकर इश्क़-ए-रसूल की वादियों से गुज़रता है और ग़ौस-ए-आज़म से इस्तिमदाद (मदद तलब करना) पर ख़त्म होता है। यह कलाम अक़ीदे की पुख़्तगी और इश्क़ की गहराई का बेहतरीन संगम है। इस पेज पर आपको इस कलाम के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
क़सीदे की जानकारी (Qasida Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | अल्लाह अल्लाह अल्लाहु, मा ली रब्बुन इल्ला हू |
| शायर (Poet) | हुज़ूर ताजुश्शरिया अल्लामा अख़्तर रज़ा ख़ान ‘अज़हरी’ |
| कलाम की क़िस्म | क़सीदा (हम्द-ओ-नात) |
Full Qasida Lyrics (Hamd & Naat)
Roman English Lyrics
Allah Allah Allahu, Ma Li Rabbun Illa Hu
Yafnal Kullu Wa Yabqa Hu, Laisal Baqi Illa HuMan Kunta Ilahi Maulaahu, Kullun Naasi Tawallahu
Mam-Maata Yaqulu Allahu, Zaakal Khalidu MahyahuRasulullahi Talaqqahu, Abshir Abdu Bi Husnahu
Ar-Ridwanu Lahu Nuzulun, Jannatu Khuldim-Ma’WahuWanhalla Salatul Lahi Ala, Mal-Laysa Shafi’an Illahu
Mam Bid’Deeni Ahyana, Hayyal Lahu MuhayyahuAdrik Abdaka Jilani, Man Ghairuka Yadfa’u Balwahu
Haza Akhtaru Adnakum, Rabbi Ahsana Maswahu
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
अल्लाह अल्लाह अल्लाहु, मा ली रब्बुन इल्ला हू
यफ़नल कुल्लु व यबक़ा हू, लैसल बाक़ी इल्ला हूमन कुन्-त इलाही मौलाहु, कुल्लुन नासि तवल्लाहु
मम-मा-त यक़ूलू अल्लाहु, ज़ाकल ख़ालिदु महयाहुरसूलुल्लाहि तलक़्क़ाहु, अबशिर अब्दु बि हुस्नाहु
अर-रिदवानु लहू नुज़ुलुन, जन्नतु ख़ुल्दिम-मअवाहुवनहल्ला सलातुल्लाहि अला, मल-लै-स शफ़ी’अन इल्लाहु
मम बिद्दीनि अहयाना, हय्याल्लाहु मुहय्याहुअदरिक अब्-द-क जीलानी, मन ग़ैरु-क यदफ़’उ बलवाहु
हाज़ा अख़-त-रु अदनाकुम, रब्बी अह-स-न मसवाहु
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
اللہ اللہ اللہ ھو، ما لي ربٌّ اِلّا ھو
یفنی الکلُّ و یبقیٰ ھو، لیس الباقی اِلّا ھومَن کنتَ الٰہی مولاہُ، کلُّ الناسِ تولّاہُ
مَن ماتَ یقولُ اللہُ، ذاک الخالدُ محیاہُرسولُ اللہِ تلقّاہُ، ابشِر عبدُ بحُسنٰہُ
الرضوانُ لہُ نُزُلٌ، جنّۃُ خُلدٍ مثواہُوانْہلَّ صلوٰۃُ اللہِ علیٰ، مَن لیس شفیعٌ اِلّا ھو
مَن بالدینِ احیانا، حیّا اللہُ مُحیّاہُادرِک عبدَک جیلانی، مَن غیرُک یدفعُ بلواہُ
ھٰذا اخترُ ادناکم، ربّی احسنَ مثواہُ
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
અલ્લાહ અલ્લાહ અલ્લાહુ, મા લી રબ્બુન ઇલ્લા હૂ
યફનલ કુલ્લુ વ યબકા હૂ, લૈસલ બાકી ઇલ્લા હૂમન કુન્-ત ઇલાહી મૌલાહુ, કુલ્લુન નાસિ તવલ્લાહુ
મમ-મા-ત યકૂલૂ અલ્લાહુ, ઝાકલ ખાલિદુ મહયાહુરસૂલુલ્લાહિ તલક્કાહુ, અબશિર અબ્દુ બિ હુસ્નાહુ
અર-રિદવાનુ લહૂ નુઝુલુન, જન્નતુ ખુલ્દિમ-મઅવાહુવનહલ્લા સલાતુલ્લાહિ અલા, મલ-લૈ-સ શફી’અન ઇલ્લાહુ
મમ બિદ્દીનિ અહયાના, હય્યાલ્લાહુ મુહય્યાહુઅદરિક અબ્-દ-ક જીલાની, મન ગૈરુ-ક યદફ’ઉ બલવાહુ
હાઝા અખ્-ત-રુ અદનાકુમ, રબ્બી અહ-સ-ન મસવાહુ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस क़सीदे का शायर कौन है?
इस शाहकार क़सीदे के शायर हुज़ूर ताजुश्शरिया, अल्लामा मुफ़्ती मोहम्मद अख़्तर रज़ा ख़ान ‘अज़हरी’ बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं। कलाम के आख़िरी शेर में उन्होंने अपना तख़ल्लुस “अख़्तर” इस्तेमाल किया है।
Q2. “मा ली रब्बुन इल्ला हू” का क्या मतलब है?
यह एक अरबी जुमला है जिसका मतलब है: “मेरा उसके (अल्लाह के) सिवा कोई रब (पालने वाला) नहीं है।” यह अल्लाह की वहदानियत (एक होने) का इक़रार है।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: इस क़सीदे को ख़ूबसूरत आवाज़ में सुनें (ओवैस रज़ा क़ादरी)।
- शायर के बारे में जानें: हुज़ूर ताजुश्शरिया के बारे में और पढ़ें।
- Read More: ताजुश्शरिया की जीवनी पढ़ें (अज़हरी मिशन)।