Lahad Mein Ishq-e-Rukh-e-Shah Ka Daagh Leke Chale Lyrics
“लहद में इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले, अंधेरी रात सुनी थी चराग़ ले के चले”, यह सिर्फ़ एक शेर नहीं, बल्कि हर सुन्नी मुसलमान के उस अक़ीदे का ऐलान है कि हुज़ूर नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का इश्क़ ही क़ब्र की तारीकी में रौशनी का सबब बनेगा। इस शाहकार नात को इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी क़लम से सजाया है।
यह नात-ए-पाक आला हज़रत के मशहूर दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” (हिस्सा दोम) में शामिल है। इस कलाम में आला हज़रत ने इश्क़-ए-रसूल की फ़ज़ीलत बयान करने के साथ-साथ बद-मज़हबों और गुस्ताख़ों के बातिल अक़ीदों पर भी क़रारी चोट की है। इस पेज पर आपको इस अक़ीदा-अफ़रोज़ नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।
नात की जानकारी (Naat Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | लहद में इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश, हिस्सा दोम (Hadaiq-e-Bakhshish, Part II) |
“Lahad Mein Ishq-e-Rukh-e-Shah Ka Daagh” Full Naat Lyrics
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
لحد میں عشقِ رُخِ شہ کا داغ لے کے چلے
اندھیری رات سُنی تھی چراغ لے کے چلےترے غلاموں کا نقشِ قدم ہے راہِ خدا
وہ کیا بہک سکے جو یہ سراغ لے کے چلےجنان بنے گی محبّانِ چار یار کی قبر
جو اپنے سینہ میں یہ چار باغ لے کے چلےمدینہ جانِ جناں وجہاں ہے وہ سن لیں
جنہیں جنونِ جناں سوئے زاغ لے کے چلےرضاؔ کسی سگِ طیبہ کے پاؤں بھی چومے
تم اور آہ کہ اتنا دماغ لے کے چلے
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
लहद में इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले,
अंधेरी रात सुनी थी चराग़ ले के चले।तिरे ग़ुलामों का नक़्श-ए-क़दम है राह-ए-ख़ुदा,
वो क्या बहक सके जो ये सुराग़ ले के चले।जिनां बनेगी मुहिब्बा-ए-चार यार की क़ब्र,
जो अपने सीना में ये चार बाग़ ले के चले।मदीना जान-ए-जिनां-ओ-जहाँ है वो सुन लें,
जिन्हें जुनून-ए-जिनां सू-ए-ज़ाग़ ले के चले।रज़ा किसी सग-ए-तैबा के पाँव भी चूमे,
तुम और आह कि इतना दिमाग़ ले के चले।
Roman English Lyrics
Lahad mein ishq-e-rukh-e-Shah ka daagh le ke chale,
Andheri raat suni thi charaagh le ke chale.Tire ghulamon ka naqsh-e-qadam hai raah-e-Khuda,
Woh kya behak sake jo yeh suraagh le ke chale.Jinaan banegi muhibbaan-e-chaar yaar ki qabr,
Jo apne seena mein yeh chaar baagh le ke chale.Madina jaan-e-jinaan-o-jahan hai woh sun lein,
Jinhein junoon-e-jinaan su-e-zaagh le ke chale.Raza kisi sag-e-Taiba ke paaon bhi choome,
Tum aur aah ki itna dimaagh le ke chale.
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
લહદ મેં ઇશ્ક-એ-રૂખ-એ-શહ કા દાગ લે કે ચલે,
અંધેરી રાત સુની થી ચરાગ લે કે ચલે.તિરે ગુલામોં કા નક્શ-એ-કદમ હૈ રાહ-એ-ખુદા,
વો ક્યા બહક સકે જો યે સુરાગ લે કે ચલે.જિનાં બનેગી મુહિબ્બા-એ-ચાર યાર કી કબ્,
જો અપને સીના મેં યે ચાર બાગ લે કે ચલે.મદીના જાન-એ-જિનાં-ઓ-જહાં હૈ વો સુન લેં,
જિન્હેં જુનૂન-એ-જિનાં સૂ-એ-ઝાગ લે કે ચલે.રઝા કિસી સગ-એ-તૈબા કે પાંવ ભી ચૂમે,
તુમ ઔર આહ કિ ઇતના દિમાગ લે કે ચલે.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस नात का शायर कौन है?
इस शाहकार नात के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. “इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़” का क्या मतलब है?
इसका मतलब है “बादशाह (यानी हुज़ूर स.अ.व.) के चेहरे के इश्क़ का निशान”। शायर कह रहा है कि हम अपनी क़ब्र में अपने दिल पर हुज़ूर के इश्क़ का निशान लेकर जाएँगे, और यही निशान हमारी अंधेरी क़ब्र में चिराग़ का काम करेगा।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: ओवैस रज़ा क़ादरी की आवाज़ में यह नात सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।
“`
—
### **SEO Meta जानकारी (अपनी वेबसाइट के SEO सेक्शन में डालें)**
**Title Tag (टाइटल):**
`Lahad Mein Ishq-e-Rukh-e-Shah Ka Daagh Leke Chale Lyrics`
**Meta Description (विवरण):**
`✅ “लहद में इश्क़-ए-रुख़-ए-शह का दाग़ ले के चले” नात के पूरे बोल (Full Lyrics) हिन्दी, रोमन, उर्दू और गुजराती में पढ़ें। Imam Ahmed Raza Khan (Aala Hazrat) के इस अक़ीदा-अफ़रोज़ कलाम को यहाँ देखें।`
**मुख्य कीवर्ड (Focus Keyword):**
`Lahad Mein Ishq-e-Rukh-e-Shah Ka Daagh Leke Chale`