Allah Allah Ke Nabi Se Faryad Hai Nafs Ki Badi Se Lyrics
“अल्लाह, अल्लाह के नबी से, फ़रियाद है नफ़्स की बदी से” यह एक ऐसी इस्लाही नज़्म (सुधारवादी कविता) है जो हर इंसान को अपने सबसे बड़े दुश्मन, यानी उसके अपने “नफ़्स” (आत्मा की बुरी इच्छाओं) से आगाह करती है। इस शाहकार कलाम को इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) ने अपनी क़लम से सजाया है।
यह कलाम आला हज़रत के मशहूर दीवान “हदाएक़-ए-बख़्शिश” में शामिल है। इसमें शायर अपने नफ़्स से सीधे बात कर रहा है, उसे उसकी बुराइयों, मक्कारियों और धोकों पर लताड़ रहा है और उससे बचने के लिए अल्लाह और उसके रसूल की बारगाह में फ़रियाद कर रहा है। यह नज़्म हमें आत्म-निरीक्षण (self-reflection) की दावत देती है।
नज़्म की जानकारी (Poem Information Table)
| फीचर (Feature) | विवरण (Details) |
|---|---|
| कलाम का उनवान | अल्लाह, अल्लाह के नबी से (फ़रियाद है नफ़्स की बदी से) |
| शायर (Poet) | इमाम अहमद रज़ा ख़ान ‘आला हज़रत’ बरेलवी |
| किताब (Book) | हदाएक़-ए-बख़्शिश (Hadaiq-e-Bakhshish) |
| कलाम की क़िस्म | इस्लाही नज़्म (Reformative Poem) |
“Allah Allah Ke Nabi Se” Full Nazm Lyrics
Urdu Lyrics (اردو کے بول)
اللہ، اللہ کے نبی سے، فریاد ہے نفس کی بدی سے
دن بھر کھیلوں میں خاک اڑائی، لاج آئی نہ ذرّوں کی ہنسی سےایمان پہ مَوت بہتر او نفس، تیری ناپاک زندگی سے
تونے ہی کیا خدا سے نادم، تونے ہی کیا خجل نبی سےکیسے آقا کا حکم ٹالا، ہم مر مٹے تیری خود سری سے
اللہ کنوئیں میں خود گِرا ہوں، اپنی نالش کروں تجھی سےہیں پشت پناہ غوثِ اعظم، کیوں ڈرتے ہو تم رضاؔ کسی سے
Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)
अल्लाह, अल्लाह के नबी से, फ़रियाद है नफ़्स की बदी से,
दिन भर खेलों में ख़ाक उड़ाई, लाज आई न ज़र्रों की हँसी से।ईमान पे मौत बेहतर ओ नफ़्स, तेरी नापाक ज़िंदगी से,
तूने ही किया ख़ुदा से नादिम, तूने ही किया ख़जल नबी से।कैसे आक़ा का हुक्म टाला, हम मर मिटे तेरी ख़ुद-सरी से,
अल्लाह! कुएँ में ख़ुद गिरा हूँ, अपनी नालिश करूँ तुझी से।हैं पुश्त-पनाह ग़ौस-ए-आज़म, क्यूँ डरते हो तुम ‘रज़ा’ किसी से।
Roman English Lyrics
Allah, Allah ke Nabi se, faryad hai nafs ki badi se,
Din bhar khelon mein khaak udaayi, laaj aayi na zarron ki hansi se.Imaan pe maut behtar o nafs, teri naapak zindagi se,
Tune hi kiya Khuda se naadim, tune hi kiya khajal Nabi se.Kaise Aaqa ka hukm taala, hum mar mite teri khud-sari se,
Allah! kuyein mein khud gira hun, apni naalish karun tujhi se.Hain pusht-panah Ghaus-e-Azam, kyun darte ho tum ‘Raza’ kisi se.
Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)
અલ્લાહ, અલ્લાહ કે નબી સે, ફરિયાદ હૈ નફ્સ કી બદી સે,
દિન ભર ખેલોં મેં ખાક ઉડાઈ, લાજ આઈ ન ઝર્રોં કી હંસી સે.ઈમાન પે મૌત બહતર ઓ નફ્સ, તેરી નાપાક ઝિંદગી સે,
તૂને હી કિયા ખુદા સે નાદિમ, તૂને હી કિયા ખજલ નબી સે.કૈસે આકા કા હુક્મ ટાલા, હમ મર મિટે તેરી ખુદ-સરી સે,
અલ્લાહ! કુએઁ મેં ખુદ ગિરા હૂઁ, અપની નાલિશ કરૂં તુઝી સે.હૈં પુશ્ત-પનાહ ગૌસ-એ-આઝમ, ક્યું ડરતે હો તુમ ‘રઝા’ કિસી સે.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
Q1. इस नज़्म का शायर कौन है?
इस शाहकार इस्लाही नज़्म के शायर इमाम-ए-अहल-ए-सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी (रहमतुल्लाह अलैह) हैं।
Q2. इस कलाम का मुख्य विषय क्या है?
इस कलाम का मुख्य विषय “नफ़्स-ए-अम्मारा” (बुराई पर उकसाने वाली आत्मा) की मज़म्मत (निंदा) करना है। शायर अपने नफ़्स को उसके गुनाहों, धोकों और नाफ़रमानियों पर शर्म दिला रहा है और आख़िर में ग़ौस-ए-आज़म को अपना पुश्त-पनाह (समर्थक) बताकर यह उम्मीद ज़ाहिर कर रहा है कि उनकी मदद से वो अपने नफ़्स पर क़ाबू पा लेगा।
ज़रूरी लिंक्स (Important Links)
- YouTube पर सुनें: इस नज़्म को ख़ूबसूरत आवाज़ में सुनें।
- शायर के बारे में जानें: रेख़्ता पर आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान के बारे में और पढ़ें।
- किताब पढ़ें: “हदाएक़-ए-बख़्शिश” ऑनलाइन पढ़ें।