Aaj Ashk Mere Naat Sunain Toh Ajab Kya Lyrics (4 Languages)

Aaj Ashk Mere Naat Sunain Toh Ajab Kya Lyrics (4 Languages)

“आज अश्क मेरे नात सुनाएँ तो अजब क्या, सुन कर वो मुझे पास बुलाएँ तो अजब क्या” यह सिर्फ़ एक नात का मطلع नहीं, बल्कि एक गुनहगार के दिल से निकली वो सदा है जो उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच अपने करीम आक़ा की रहमत की आस लगाए हुए है। इस दिल-सोज़ कलाम को अपने वक़्त के अज़ीम शायर अदीब राय पुरी ने लिखा है।

इस नात का हर शेर एक गुनहगार की उस दिली कैफ़ियत को बयान करता है कि मैं जानता हूँ कि मैं इस क़ाबिल नहीं, लेकिन मेरे आक़ा की शान-ए-करीमी इतनी बुलंद है कि अगर वो मुझ पर करम फ़रमा दें तो इसमें कोई ताज्जुब की बात नहीं। इस पेज पर आपको इस रूहानी नात के मुकम्मल बोल **चार भाषाओं (हिंदी, रोमन, उर्दू और गुजराती)** में मिलेंगे।

नात की जानकारी (Naat Information Table)

 

फीचर (Feature)विवरण (Details)
कलाम का उनवानआज अश्क मेरे नात सुनाएँ तो अजब क्या
शायर (Poet)अदीब राय पुरी (Adeeb Rai Puri)
मशहूर नात-ख़्वाँओवैस रज़ा क़ादरी, हूरिया रफ़ीक़ क़ादरी
कलाम की क़िस्मनात-ए-पाक

“Aaj Ashk Mere Naat Sunain” Full Naat Lyrics

Urdu Lyrics (اردو کے بول)

آج اشک میرے نعت سنائیں تو عجب کیا
سن کر وہ مجھے پاس بلائیں تو عجب کیا

اُن پر تو گنہگار کا سب حال کُھلا ہے
اس پر بھی وہ دامن میں چھپائیں تو عجب کیا

منہ ڈھانپ کے رکھنا کہ گنہگار بہت ہوں
میت کو میری دیکھنے آئیں تو عجب کیا

نہ زادِ سفر ہے نہ کوئی کام بھلے ہیں
پھر بھی مجھے سرکار بلائیں تو عجب کیا

وہ حُسنِ دو عالم ہیں ادیبؔ ان کےقدم سے
صحرا میں اگر پھول کھل آئیں تو عجب کیا

Hindi Lyrics (हिन्दी बोल)

आज अश्क मेरे नात सुनाएँ तो अजब क्या,
सुन कर वो मुझे पास बुलाएँ तो अजब क्या।

उन पर तो गुनहगार का सब हाल खुला है,
इस पर भी वो दामन में छुपाएँ तो अजब क्या।

मुँह ढाँप के रखना कि गुनहगार बहुत हूँ,
मय्यत को मेरी देखने आएँ तो अजब क्या।

न ज़ाद-ए-सफ़र है न कोई काम भले हैं,
फिर भी मुझे सरकार बुलाएँ तो अजब क्या।

वो हुस्न-ए-दो-आलम हैं ‘अदीब’ उनके क़दम से,
सहरा में अगर फूल खिल आएँ तो अजब क्या।

Roman English Lyrics

Aaj ashk mere naat sunayein toh ajab kya,
Sun kar woh mujhe paas bulayein toh ajab kya.

Un par toh gunahgaar ka sab haal khula hai,
Is par bhi woh daaman mein chhupayein toh ajab kya.

Munh dhaanp ke rakhna ki gunahgaar bohot hun,
Mayyat ko meri dekhne aayein toh ajab kya.

Na zaad-e-safar hai na koi kaam bhale hain,
Phir bhi mujhe Sarkaar bulayein toh ajab kya.

Woh husn-e-do-aalam hain ‘Adeeb’ unke qadam se,
Sehra mein agar phool khil aayein toh ajab kya.

Gujarati Lyrics (ગુજરાતી ગીતો)

આજ અશ્ક મેરે નાત સુનાએઁ તો અજબ ક્યા,
સુન કર વો મુઝે પાસ બુલાએઁ તો અજબ ક્યા.

ઉન પર તો ગુનહગાર કા સબ હાલ ખુલા હૈ,
ઇસ પર ભી વો દામન મેં છુપાએઁ તો અજબ ક્યા.

મુંહ ઢાંપ કે રખના કિ ગુનહગાર બહોત હૂઁ,
મય્યત કો મેરી દેખને આએઁ તો અજબ ક્યા.

ન ઝાદ-એ-સફર હૈ ન કોઈ કામ ભલે હૈં,
ફિર ભી મુઝે સરકાર બુલાએઁ તો અજબ ક્યા.

વો હુસ્ન-એ-દો-આલમ હૈં ‘અદીબ’ ઉનકે કદમ સે,
સહરા મેં અગર ફૂલ ખિલ આએઁ તો અજબ ક્યા.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

Q1. इस नात का शायर कौन है?

इस दिल-सोज़ नात के शायर सय्यद अब्दुल मजीद ‘अदीब’ राय पुरी हैं। उन्होंने आख़िरी शेर में अपना तख़ल्लुस “अदीब” इस्तेमाल किया है।

Q2. “अजब क्या” का बार-बार इस्तेमाल क्यों किया गया है?

“तो अजब क्या” (तो इसमें ताज्जुब की क्या बात है) का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए किया गया है कि हुज़ूर (स.अ.व.) की शान-ए-करीमी और रहमत इतनी वसीअ (विशाल) है कि अगर वो मुझ जैसे गुनहगार पर भी मेहरबानी कर दें, तो यह उनकी शान के عین مطابق है, इसमें कोई हैरत की बात नहीं होगी।

ज़रूरी लिंक्स (Important Links)

 

 

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